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By: Ravindra Sikarwar

इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवाय अस्पताल) परिसर में 773.07 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए 1450 बिस्तरीय अस्पताल भवन का भूमिपूजन किया। यह परियोजना न केवल इंदौर बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र और पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के मार्गदर्शन में देशभर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में भी पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

एमवाय अस्पताल मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है और इसकी अपनी अलग पहचान है। नए भवन के निर्माण से अस्पताल की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। मध्य प्रदेश भवन एवं संनिर्माण निगम द्वारा बनाए जा रहे इस भवन में विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग वार्ड होंगे। इनमें मेडिसिन विभाग में 330 बिस्तर, सर्जरी में 330, ऑर्थोपेडिक्स में 180, बाल रोग में 100, न्यूरो सर्जरी में 60, प्रसूति एवं स्त्री रोग में 100, नेत्र विभाग में 80 और इमरजेंसी में 180 बिस्तर शामिल हैं। मुख्य भवन पर 528 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 550 क्षमता वाले नर्सिंग हॉस्टल पर 21.37 करोड़, 250 सीटों वाले मिनी ऑडिटोरियम पर 1.60 करोड़, पार्किंग सुविधा पर 31.50 करोड़ और विद्युतीकरण, बाउंड्री वॉल तथा सोलर पैनल पर 25.53 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पुरानी इमारत की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि अब आधुनिक सुविधाओं से लैस नया भवन मरीजों को राहत देगा। यह परियोजना राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इसी दिन मुख्यमंत्री ने इंदौर में विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी की, जिसमें शहर को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में बंगाली चौराहे से खजराना तक करीब 3.5 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट को भूमिगत बनाने का निर्णय हुआ। इस बदलाव पर राज्य सरकार अतिरिक्त 800 करोड़ रुपये खर्च करेगी, ताकि शहर के घने इलाकों में ट्रैफिक और सौंदर्य पर कोई असर न पड़े। इससे पहले यह हिस्सा एलिवेटेड था, लेकिन जनप्रतिनिधियों की मांग पर भूमिगत करने का फैसला लिया गया।

बैठक में इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के विस्तार पर भी मुहर लगी। अब उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, नागदा, बदनावर और शाजापुर-मक्सी जैसे क्षेत्रों को जोड़कर इसे लगभग 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। पहले यह क्षेत्रफल करीब 10 हजार वर्ग किलोमीटर था। इस विस्तार से मालवा-निमाड़ क्षेत्र का एकीकृत विकास होगा, जिसमें उद्योग, पर्यटन और परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर को क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अब स्पष्ट हो गया कि मुख्यमंत्री इंदौर के प्रभारी मंत्री नहीं हैं, इसलिए अधिकारी बहाने नहीं बना सकेंगे। विकास कार्यों में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि जो बांटना था, बांट दिया और जो नहीं बंटा, उसे अपने पास रख लिया।

कुल मिलाकर, इंदौर का यह दौरा राज्य सरकार के विकास एजेंडे को रफ्तार देने वाला साबित हुआ। स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में लिए गए फैसले शहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। आने वाले समय में इंदौर न केवल स्वच्छता बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं के लिए भी मिसाल बनेगा।

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