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by-Ravindra Sikarwar

भारत जल्द 97 नए तेजस Mk-1A विमानों की खरीद के लिए HAL के साथ 66 हजार करोड़ रुपये का करार करने जा रहा है। जानें कब मिलेंगे विमान और मिसाइल ट्रायल्स की पूरी जानकारी।

भारत की मेगा डिफेंस डील: तेजस Mk-1A से वायुसेना को नई ताकत
भारत अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने अगस्त 2025 में 97 नए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस Mk-1A की खरीद को मंजूरी दी थी। अब रक्षा मंत्रालय हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ लगभग 66 हजार करोड़ रुपये का करार करने जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह करार अक्टूबर 2025 में साइन होने की संभावना है, लेकिन केवल तब जब HAL पहले विमानों की डिलीवरी शुरू कर देगा।

HAL की तैयारी और उत्पादन क्षमता:
HAL की वर्तमान उत्पादन क्षमता सालाना 24 विमान है। कंपनी ने पहले ही 10 तेजस Mk-1A तैयार कर लिए हैं। शुरुआती दो विमानों की वायुसेना को डिलीवरी के बाद ही नए 97 विमानों का अनुबंध फाइनल होगा।

HAL के सूत्रों ने बताया कि सप्लाई चेन की समस्याएं अब दूर हो गई हैं, और विमानों का निर्माण तय समय पर पूरा होगा।

अमेरिकी इंजन सप्लाई में सुधार:
LCA कार्यक्रम में अब तक सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस से इंजन सप्लाई में देरी रही। हालांकि, अब स्थिति सुधर रही है। GE ने भारत को अब तक 3 इंजन सौंपे हैं और दिसंबर तक 7 और इंजन मिलेंगे। अगले साल 20 और इंजन आने की संभावना है।

मिसाइल ट्रायल्स और विमान की ताकत:
तेजस Mk-1A के साथ ASRAAM मिसाइल का परीक्षण पूर्वी सेक्टर में शुरू हो चुका है। इसके बाद बियोंड विज़ुअल रेंज (BVR) मिसाइल का फायरिंग ट्रायल होगा।

ये परीक्षण विमान की पूरी क्षमता और युद्ध कौशल का प्रमाण हैं।

ट्रेनर वर्जन और आधुनिक तकनीक:
नई डील के तहत 29 ट्रेनर जेट्स भी वायुसेना को मिलेंगे। ये पहले से अधिक एडवांस होंगे और इनमें उत्तम AESA रडार तथा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लगाए जाएंगे।

इस सौदे से वायुसेना को सिर्फ संख्या में मजबूती नहीं मिलेगी, बल्कि पुराने मिग-21 जैसे विमानों की जगह आधुनिक, स्वदेशी तकनीक से लैस विमानों को शामिल किया जा सकेगा।

निष्कर्ष:
भारत की यह मेगा डिफेंस डील न सिर्फ स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि वायुसेना की ताकत और आधुनिक तकनीक में सुधार लाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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