By: Ravindra Sikarwar
2025 भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए कई वैश्विक चुनौतियों वाला साल रहा। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक की ऊंची टैरिफ लगाने के बावजूद, भारत का निर्यात प्रदर्शन लचीला रहा। निर्यातकों ने नए बाजारों की खोज, उत्पादों में विविधीकरण और सरकार की नीतियों का सहारा लेकर इस झटके को झेला। आने वाले संकेत बताते हैं कि 2026 में भी यह सकारात्मक गति बनी रह सकती है।
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि व्यापार प्रवाह हमेशा नई दिशाएं तलाश लेता है। यह भारतीय निर्यात की वर्तमान स्थिति पर पूरी तरह लागू होता है। कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व के संघर्ष, रेड सी में शिपिंग संकट, सेमीकंडक्टर की कमी और अब अमेरिकी टैरिफ जैसी बाधाओं के बावजूद भारत ने अपने निर्यात को स्थिर रखा है।
वाणिज्य सचिव के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल माल और सेवा निर्यात ने लगभग 825 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर हासिल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। वर्तमान वित्त वर्ष (अप्रैल से नवंबर 2025) में निर्यात पहले ही 562 अरब डॉलर को पार कर चुका है। ये आंकड़े वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को रेखांकित करते हैं। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए 2026 में भी निर्यात वृद्धि की अच्छी संभावनाएं हैं।
प्रमुख निर्यात आंकड़े एक नजर में
- 2020 में माल निर्यात → लगभग 276 अरब डॉलर था।
- 2021 में यह → 395 अरब डॉलर।
- 2022 में → 453 अरब डॉलर तक पहुंचा।
- 2023 में थोड़ी गिरावट के साथ → 389 अरब डॉलर रहा।
- 2024 में फिर रिकवरी → 443 अरब डॉलर।
- 2025 में जनवरी से नवंबर तक → 407 अरब डॉलर हो चुका है।
खास तौर पर नवंबर 2025 में अमेरिका को निर्यात में 22 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 6.98 अरब डॉलर तक पहुंचा। यह दिखाता है कि भारतीय निर्यातक बदलते हालात में खुद को अनुकूलित करने में सक्षम हैं।
वैश्विक चुनौतियां और दबाव
वैश्विक व्यापार पर चिंताएं बनी हुई हैं। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुसार, 2025 में वैश्विक व्यापार वृद्धि 2.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन 2026 में यह घटकर मात्र 0.5 प्रतिशत रह सकती है। ऊंचे टैरिफ, नीतिगत अनिश्चितताएं, विकसित देशों में मांग की कमजोरी और आय वृद्धि की धीमी गति जैसे कारक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत सरकार का सकारात्मक दृष्टिकोण
इन चुनौतियों के बावजूद भारत सरकार निर्यात बढ़ाने के लिए आशावादी है और सक्रिय कदम उठा रही है। प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
- 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात प्रोत्साहन पैकेज।
- अतिरिक्त क्रेडिट गारंटी और ऋण सुविधाएं।
- निर्यात ऋण पर राहत और अवधि विस्तार।
- मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का प्रभावी उपयोग।
ये कदम निर्यातकों को कठिन परिस्थितियों में मजबूती प्रदान कर रहे हैं। नए बाजारों जैसे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में फोकस बढ़ाने से भी लाभ मिल रहा है। सेवाओं का निर्यात, खासकर आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में मजबूत वृद्धि, कुल निर्यात को सहारा दे रही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की यह लचीलापन वैश्विक मंदी के दौर में भी सकारात्मक संदेश देता है। 2026 में यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं, तो भारत का निर्यात और ऊंचाइयों को छू सकता है। निर्यातकों की अनुकूलन क्षमता और सरकारी समर्थन इस मजबूत उड़ान की कुंजी बने हुए हैं।
