By: Ravindra Sikarwar
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग एक बार फिर मजबूत हुआ है। मिनी नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (आईओएल) ने फ्रांसीसी कंपनी सैफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के साथ दो उच्च परिशुद्धता वाली रक्षा प्रणालियों के उत्पादन हस्तांतरण का महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार से इन प्रणालियों का निर्माण अब भारत में ही होगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति प्रदान करेगा। यह कदम भारतीय सेना की तोपखाने और वायु रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
यह सहयोग समझौता 22 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। हस्ताक्षर समारोह में रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार की मौजूदगी में आईओएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तुषार त्रिपाठी और सैफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के रक्षा वैश्विक व्यापार इकाई प्रमुख एलेक्जेंडर जिग्लर ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। यह करार जनवरी 2024 में हस्ताक्षरित एमओयू का विस्तार है, जो दोनों कंपनियों के बीच लंबे सहयोग को दर्शाता है।
इस समझौते के तहत दो अत्याधुनिक प्रणालियों का उत्पादन भारत में स्थानांतरित किया जाएगा। आईओएल इन प्रणालियों के निर्माण, अंतिम असेंबली, परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और पूर्ण जीवन चक्र समर्थन की जिम्मेदारी संभालेगी। सैफरान अपनी वैश्विक विशेषज्ञता इनर्टियल नेविगेशन और फायर कंट्रोल तकनीकों में प्रदान करेगी। इससे भारतीय रक्षा उद्योग की आधारभूत संरचना मजबूत होगी और सेना की युद्धक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पहली प्रणाली: सिग्मा 30एन इनर्टियल नेविगेशन सिस्टम
सिग्मा 30एन एक डिजिटल रिंग लेजर जाइरो आधारित इनर्टियल नेविगेशन और पोजिशनिंग प्रणाली है। यह तोपखाने की बंदूकों, वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइल प्लेटफॉर्म्स और रडार सिस्टम्स में उपयोग की जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि यह जीपीएस सिग्नल अनुपलब्ध होने पर भी सटीक स्थिति और दिशा निर्धारण प्रदान करती है।
युद्ध के मैदान में यह प्रणाली दुश्मन की तोपों की स्थिति का तुरंत पता लगाने में सहायक होती है। इससे तोपखाने की इकाइयों की तैनाती तेज और प्रभावी होती है। भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से सेना को स्वतंत्र और विश्वसनीय नेविगेशन सुविधा मिलेगी, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करेगी।
दूसरी प्रणाली: सीएम-3-एमआर डायरेक्ट फायरिंग साइट
सीएम-3-एमआर एक उन्नत डायरेक्ट फायरिंग साइट सिस्टम है, जो विशेष रूप से तोपखाने की बंदूकों और ड्रोन-विरोधी प्लेटफॉर्म्स के लिए डिजाइन किया गया है। यह सटीक लाइन-ऑफ-साइट लक्ष्यीकरण सुनिश्चित करता है, जिससे पारंपरिक और असममित युद्ध दोनों परिदृश्यों में हथियारों की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन का खतरा बढ़ने के साथ यह प्रणाली विशेष महत्व रखती है। इससे तोपें और एंटी-ड्रोन सिस्टम तेजी से और सटीकता से लक्ष्य को भेद सकेंगे। दोनों प्रणालियां युद्ध-सिद्ध हैं और कई देशों की सेनाओं में सफलतापूर्वक उपयोग हो रही हैं।
रणनीतिक महत्व और आत्मनिर्भरता की दिशा
यह समझौता भारत की रक्षा तैयारी को नई ऊंचाई देगा। स्थानीय उत्पादन से न केवल लागत कम होगी, बल्कि रखरखाव और अपग्रेडेशन भी आसान हो जाएगा। इससे भारतीय सेना की भूमि आधारित हथियार प्रणालियों की सटीकता, स्वायत्तता और प्रदर्शन में सुधार आएगा।
फ्रांस के साथ यह सहयोग राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के बाद और मजबूत हुआ है। सैफरान पहले से ही भारत में हेलीकॉप्टर इंजन, लड़ाकू विमानों के लिए नेविगेशन सिस्टम और अन्य तकनीकों में भागीदार है। यह करार आयात निर्भरता घटाने और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का प्रमाण है।
रक्षा क्षेत्र में नई उम्मीद
यह समझौता ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और मजबूत कदम है। इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड की औद्योगिक क्षमता और सैफरान की वैश्विक विशेषज्ञता का संयोजन भारतीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाएगा। आने वाले समय में ये प्रणालियां भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध के चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएंगी। यह सहयोग न केवल तकनीकी प्रगति लाएगा, बल्कि रोजगार सृजन और निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ावा देगा। कुल मिलाकर, यह भारत की रक्षा तैयारियों के लिए एक सकारात्मक और दूरगामी विकास है।
