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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत देते हुए, देश के आठ प्रमुख कोर सेक्टर (बुनियादी उद्योगों) की वृद्धि दर मई 2025 में गिरकर 0.7% पर आ गई है। यह पिछले नौ महीनों में सबसे निचली वृद्धि दर है, जिसने औद्योगिक उत्पादन और समग्र आर्थिक विकास पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

इससे पहले अप्रैल 2025 में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 1% थी, जबकि पिछले साल मई 2024 में यह 6.9% थी। यह गिरावट देश के औद्योगिक गतिविधियों में मंदी का स्पष्ट संकेत देती है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी अनिश्चितता बनी हुई है।

कोर सेक्टर क्या हैं और उनका महत्व क्या है?
भारत के कोर सेक्टर में आठ प्रमुख उद्योग शामिल हैं, जो देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में लगभग 40.27% का महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये आठ उद्योग हैं:

  1. कोयला
  2. कच्चा तेल
  3. प्राकृतिक गैस
  4. रिफाइनरी उत्पाद
  5. उर्वरक
  6. इस्पात (स्टील)
  7. सीमेंट
  8. बिजली

इन उद्योगों का प्रदर्शन सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करता है, क्योंकि ये विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट (आदान) प्रदान करते हैं।

धीमी वृद्धि के मुख्य कारण:
मई 2025 में कोर सेक्टर की धीमी वृद्धि मुख्य रूप से कुछ प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन में संकुचन के कारण हुई है। जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • बिजली उत्पादन: मई 2024 की तुलना में मई 2025 में बिजली उत्पादन में 5.8% की गिरावट दर्ज की गई है। यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि बिजली का औद्योगिक गतिविधियों में सबसे अधिक उपयोग होता है।
  • कच्चा तेल: कच्चे तेल का उत्पादन लगातार पांचवें महीने कम हुआ है, जिसमें मई में 1.8% की गिरावट आई।
  • प्राकृतिक गैस: प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 3.6% की कमी आई है, जो लगातार 11वां महीना है जब इसमें संकुचन देखा गया है। इसका सीधा असर उर्वरक क्षेत्र पर भी पड़ता है।
  • उर्वरक: उर्वरक उत्पादन में भी 5.9% की गिरावट दर्ज की गई, जो प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में कमी से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, कुछ क्षेत्रों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है, जिसने कुल गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा। सीमेंट उत्पादन में 9.2% की वृद्धि और इस्पात उत्पादन में 6.7% की वृद्धि देखी गई। कोयला उत्पादन 2.8% बढ़ा, और रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन 1.1% ऊपर रहा।

संभावित प्रभाव और आगे की राह:
कोर सेक्टर की यह सुस्त वृद्धि आगामी औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़ों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यह भारत की ऊर्जा और इनपुट-निर्भर क्षेत्रों में कुछ ढांचागत कमजोरियों को भी दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि मई के उत्तरार्ध में मानसून के जल्दी आने से हुई अत्यधिक बारिश ने बिजली और कुछ खनन क्षेत्रों के प्रदर्शन पर असर डाला हो सकता है।

सरकार और नीति निर्माताओं को अब इन क्षेत्रों में मांग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। ऊर्जा विविधीकरण, बुनियादी ढांचे के निवेश और औद्योगिक प्रोत्साहन पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण होगा ताकि भविष्य में ऐसी मंदी से बचा जा सके और आर्थिक विकास की गति को बनाए रखा जा सके।

आपको क्या लगता है कि भारत के कोर सेक्टर की इस धीमी वृद्धि को सुधारने के लिए सरकार को कौन से तत्काल कदम उठाने चाहिए?