by-Ravindra Sikarwar
वाशिंगटन: विश्व की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक का निजी क्रेडिट विभाग एक भयावह वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो गया है, जिसमें भारतीय मूल के एक टेलीकॉम उद्यमी बंकिम ब्रह्मभट्ट पर 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,200 करोड़ रुपये) का कर्ज धोखा देने का आरोप लगाया गया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैकरॉक की सहायक कंपनी एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स और अन्य प्रमुख उधारदाताओं ने ब्रह्मभट्ट की कंपनियों पर जाली ग्राहक खाते और बकाया राशि तैयार करने का इल्जाम लगाया है, जो ऋण की गारंटी के रूप में इस्तेमाल की गई थीं। इस घोटाले को उधारदाताओं ने “ब्रीदटेकिंग” (आश्चर्यजनक) धोखाधड़ी करार दिया है, जो निजी क्रेडिट बाजार में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।
ब्रह्मभट्ट कौन हैं?
बंकिम ब्रह्मभट्ट, जो गुजरात मूल के हैं, बैंकाई ग्रुप के संस्थापक और प्रेसिडेंट-सीईओ हैं। यह ग्रुप पिछले तीन दशकों से वैश्विक टेलीकॉम और तकनीकी सेवाएं प्रदान कर रहा है, जिसमें वॉयस और मैसेजिंग सेवाएं प्रमुख ऑपरेटरों को दी जाती हैं। उनके स्वामित्व वाली अमेरिका स्थित कंपनियां ब्रॉडबैंड टेलीकॉम और ब्रिजवॉयस हैं, जो टेलीकॉम सेवाओं में सक्रिय हैं। ब्रह्मभट्ट का लिंक्डइन प्रोफाइल हाल ही में हटा दिया गया है, और उनकी वर्तमान लोकेशन अज्ञात है। उनके वकील ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ब्रह्मभट्ट किसी भी धोखाधड़ी में लिप्त नहीं हैं।
धोखाधड़ी की पूरी कहानी:
यह मामला सितंबर 2020 में शुरू हुआ, जब एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स ने ब्रह्मभट्ट से जुड़ी एक फाइनेंशियल इकाई को पहली बार ऋण दिया। शुरुआती ऋण 10 मिलियन डॉलर का था, लेकिन 2021 की शुरुआत में इसे बढ़ाकर लगभग 385 मिलियन डॉलर कर दिया गया। फिर अगस्त 2024 में इसे 430 मिलियन डॉलर तक विस्तारित किया गया। इन ऋणों की शर्त यह थी कि ब्रह्मभट्ट की कंपनियां अपने ग्राहकों से बकाया राशि (अकाउंट्स रिसीवेबल) को गारंटी के रूप में गिरवी रखेंगी।
लेकिन जांच में पता चला कि ये बकाया राशियां पूरी तरह जाली थीं। उधारदाताओं ने पिछले दो वर्षों में प्रदान की गई ग्राहक ईमेल की जांच की, और हर एक जाली निकली। ब्रह्मभट्ट की कंपनियों ने टी-मोबाइल, टेल्स्ट्रा और बेल्जियन टेलीकॉम ऑपरेटर बीआईसीएस जैसे बड़े नामों के जाली चालान (इनवॉयस) और अनुबंध तैयार किए। जुलाई में, बीआईसीएस के एक सुरक्षा अधिकारी ने क्विन इमैनुएल (उधारदाताओं के वकील) को लिखित में पुष्टि की कि कंपनी का ब्रह्मभट्ट की फर्मों से कोई संबंध नहीं है, और इसे “कन्फर्म्ड फ्रॉड अटेम्प्ट” करार दिया।
उधारदाताओं के मुकदमे के अनुसार, “ब्रह्मभट्ट ने केवल कागजों पर मौजूद संपत्तियों का एक जटिल बैलेंस शीट तैयार किया।” आरोप है कि ऋण की राशि को भारत और मॉरीशस के ऑफशोर खातों में स्थानांतरित कर दिया गया, जो गारंटी के रूप में गिरवी रखी जानी थी। जब एचपीएस अधिकारियों ने अनियमितताओं पर सवाल उठाए, तो ब्रह्मभट्ट ने चिंताओं को खारिज कर दिया और जल्द ही कॉल्स व ईमेल का जवाब देना बंद कर दिया।
कानूनी कार्रवाई और प्रभाव:
अगस्त 2025 में, उधारदाताओं ने ब्रह्मभट्ट की कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि उन्हें 500 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि बकाया है। इस धोखाधड़ी में फ्रेंच बैंक बीएनपी परिबास भी शामिल है, जिसने एचपीएस को ब्रह्मभट्ट की इकाइयों को ऋण वित्तपोषण में सहायता दी। बैंक ने सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार किया है।
यह घटना ब्लैकरॉक के लिए संवेदनशील समय पर आई है, क्योंकि कंपनी ने इस साल ही 120 अरब डॉलर में एचपीएस को अधिग्रहित किया था ताकि निजी क्रेडिट बाजार में अपनी पैठ मजबूत कर सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला निजी क्रेडिट क्षेत्र में बढ़ते जोखिमों, जैसे धोखाधड़ी और कम पारदर्शिता, को रेखांकित करता है। नियामक और निवेशक इसकी बारीकी से निगरानी कर रहे हैं, क्योंकि यह हाल के वर्षों में इस बाजार को प्रभावित करने वाली सबसे बड़ी कथित वित्तीय धोखाधड़ी में से एक है।
जांच जारी है, और उधारदाता राशि वसूलने के लिए प्रयासरत हैं। यह घटना वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारतीय मूल के उद्यमियों की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है, हालांकि ब्रह्मभट्ट के वकील ने सभी आरोपों को झूठा बताते हुए बचाव की बात कही है।
