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by-Ravindra Sikarwar

अर्कांसस, अमेरिका: एक साधारण गलतफहमी ने एक भारतीय मूल के व्यक्ति की अमेरिकी जिंदगी को तहस-नहस कर दिया। अर्कांसस राज्य के बेंटन शहर में रहने वाले कपिल रघु का वर्क वीजा रद्द हो गया और अब वे डिपोर्टेशन के कगार पर हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि स्थानीय पुलिस ने उनकी कार में रखी एक इत्र की बोतल को अवैध अफीम समझ लिया। यह घटना मई 2025 में हुई थी, जब एक मामूली ट्रैफिक उल्लंघन के दौरान हुई चेकिंग ने कपिल की जिंदगी बदल दी। हालांकि, जांच में साबित हो गया कि बोतल में महज इत्र था, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी – उन्हें 30 दिनों तक हिरासत में रखा गया और उनका वीजा रद्द कर दिया गया। कपिल, जो एक अमेरिकी नागरिक से शादीशुदा हैं और स्थायी निवास की प्रक्रिया में थे, अब न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

घटना का पूरा विवरण: ट्रैफिक स्टॉप से हिरासत तक का सफर
यह पूरी कहानी 3 मई 2025 को शुरू हुई, जब कपिल रघु फूड डिलीवरी के काम से लौट रहे थे। बेंटन पुलिस ने उन्हें एक मामूली ट्रैफिक नियम तोड़ने के संदेह में रोका। चेकिंग के दौरान अधिकारियों की नजर कार के सेंटर कंसोल में रखी एक छोटी बोतल पर पड़ी, जिस पर “ओपियम” (Opium) लिखा था। पुलिस ने इसे तुरंत अवैध नशीला पदार्थ अफीम समझ लिया और कपिल को नारकोटिक्स के कब्जे के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। बॉडी कैम वीडियो में साफ दिखता है कि एक अधिकारी कपिल से कहते हैं, “तुम्हारी कार में ओपियम की एक शीशी मिली है।” कपिल ने बार-बार समझाने की कोशिश की कि यह Yves Saint Laurent (YSL) का डिजाइनर इत्र है, जिसका नाम “ओपियम” है – एक लोकप्रिय खुशबू – लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया।

गिरफ्तारी के बाद कपिल को सलाइन काउंटी जेल में तीन दिनों तक रखा गया। वहां अधिकारियों ने उनके इमिग्रेशन पेपर्स चेक किए और एक “प्रशासनिक त्रुटि” का हवाला देकर दावा किया कि उनका वीजा एक्सपायर हो चुका है। इसके बाद उन्हें यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की हिरासत में भेज दिया गया, जहां से उन्हें लुइसियाना के एक संघीय इमिग्रेशन सेंटर में ट्रांसफर कर दिया गया। कुल मिलाकर, कपिल को 30 दिनों तक हिरासत में रखा गया, जिस दौरान उनका वर्क वीजा रद्द कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने न केवल उनकी नौकरी छीन ली, बल्कि अमेरिका में उनकी स्थायी बसी हुई जिंदगी को खतरे में डाल दिया।

जांच और आरोपों का खुलासा: इत्र साबित, लेकिन नुकसान अपूरणीय
कपिल की गिरफ्तारी के बाद अर्कांसस स्टेट क्राइम लैब ने बोतल की जांच की, जिसमें साफ हो गया कि यह अफीम नहीं, बल्कि महज इत्र था। 20 मई 2025 को जिला अदालत ने नारकोटिक्स से जुड़े सभी आरोप हटा दिए। कपिल के वकील माइक लॉक्स ने बताया कि यह एक साफ गलतफहमी थी, लेकिन ICE की हिरासत के कारण कपिल का इमिग्रेशन स्टेटस “डिपोर्टेशन” मोड में चला गया। इसका मतलब है कि अब कोई भी छोटा-मोटा अपराध – यहां तक कि पैदल सड़क पार करने का उल्लंघन – उन्हें तुरंत देश से बाहर करने का आधार बन सकता है। कपिल ने स्थानीय अखबार सलाइन कूरियर को बताया, “मैं सभी नियमों का पालन कर रहा था। गिरफ्तारी के समय मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। यह मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दौर था।”

कपिल रघु की पृष्ठभूमि: अमेरिकी सपनों का पीछा करने वाला प्रवासी
कपिल रघु भारतीय मूल के हैं और कई वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं। वे एक अमेरिकी महिला एश्ले मेज से शादीशुदा हैं और स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) तथा नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। अर्कांसस में रहते हुए वे फूड डिलीवरी और अन्य छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे थे। उनकी पत्नी एश्ले ने एक फंडरेजिंग पेज पर लिखा कि यह घटना कपिल के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। कपिल की कहानी उन लाखों भारतीय प्रवासियों की याद दिलाती है जो अमेरिका में बेहतर भविष्य की तलाश में आते हैं, लेकिन छोटी सी भूल या गलतफहमी उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है।

कानूनी संघर्ष और परिवार का दर्द: फंडरेजिंग से न्याय की उम्मीद
आरोप हटने के बाद भी कपिल का संघर्ष खत्म नहीं हुआ। उनके वकील माइक लॉक्स ने ICE को एक पत्र लिखा है, जिसमें वीजा बहाल करने की मांग की गई है। लॉक्स ने कहा, “कपिल अब ‘डिपोर्टेशन स्टेटस’ में हैं, जो उनकी जिंदगी को असुरक्षित बना रहा है।” परिवार ने कानूनी खर्चों और दैनिक जरूरतों के लिए एक क्राउडफंडिंग कैंपेन शुरू किया है, जिसमें अब तक हजारों डॉलर इकट्ठा हो चुके हैं। एश्ले मेज ने अपील की, “यह अन्याय है। कपिल निर्दोष हैं और उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।” इस घटना ने कपिल के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है, जबकि उनकी पत्नी की सुरक्षा की भावना हिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गलतफहमियां प्रवासियों के लिए आम हैं, खासकर जब सांस्कृतिक अंतर नामों या ब्रांड्स को लेकर होता है।

व्यापक प्रभाव: प्रवासियों के लिए सबक और सतर्कता की जरूरत
यह मामला अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की कठोरता और पुलिस की जल्दबाजी को उजागर करता है। बॉडी कैम वीडियो के सार्वजनिक होने से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जहां लोग #JusticeForKapil जैसे हैशटैग से समर्थन जता रहे हैं। भारतीय समुदाय के संगठन इसे एक उदाहरण मान रहे हैं कि प्रवासियों को हमेशा दस्तावेज सही रखने और स्पष्ट संवाद करने की सलाह देते हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा, “ऐसे ब्रांड नाम जैसे ‘ओपियम’ भ्रम पैदा कर सकते हैं। प्रवासियों को अपने सामान के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए।” फिलहाल, कपिल का केस ICE और अदालत में चल रहा है, और उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।

निष्कर्ष: एक गलतफहमी से बिखरते सपने
कपिल रघु की यह दास्तान बताती है कि कैसे एक छोटी सी भूल जीवन को पटरी से उतार सकती है। इत्र की बोतल, जो खुशबू का प्रतीक थी, उनके लिए दर्द का कारण बन गई। परिवार और समुदाय के समर्थन से वे लड़ रहे हैं, लेकिन यह घटना अमेरिकी प्रवासियों के लिए चेतावनी है – सतर्क रहें, क्योंकि कोई भी सामान्य दिन असाधारण संकट में बदल सकता है। कपिल की अपील है कि उनका वीजा बहाल हो और वे अपनी अमेरिकी जिंदगी दोबारा संवार सकें। यह कहानी न केवल न्याय की मांग करती है, बल्कि सिस्टम में सुधार की भी।

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