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by-Ravindra Sikarwar

FIFA और AFC ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) को चेतावनी दी है कि यदि वे 30 अक्टूबर तक नया संविधान नहीं अपनाते हैं, तो उन्हें निलंबित किया जा सकता है। यह चेतावनी भारतीय फुटबॉल के भविष्य के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रही है।

क्या है मामला?
यह पूरा मामला AIFF के संविधान से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में AIFF के संविधान को रद्द कर दिया था और एक प्रशासकों की समिति (COA) का गठन किया था। यह समिति AIFF के रोज़मर्रा के कार्यों को देख रही थी और एक नए संविधान का मसौदा तैयार कर रही थी, जिसे FIFA और AFC के मानदंडों के अनुरूप होना था।

लेकिन, इस प्रक्रिया में कुछ देरी हुई और FIFA ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। FIFA ने बाहरी हस्तक्षेप को अपने नियमों का उल्लंघन माना, क्योंकि वे मानते हैं कि किसी भी राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।

FIFA और AFC की चेतावनी:
अगस्त 2022 में, FIFA ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को निलंबित कर दिया था, जिसके कारण भारत में होने वाला U-17 महिला विश्व कप भी खतरे में आ गया था। उस समय, FIFA ने AIFF को एक नया, लोकतांत्रिक रूप से चुने गए निकाय को स्थापित करने के लिए कहा था। हालाँकि, बाद में निलंबन हटा लिया गया और टूर्नामेंट सफलतापूर्वक आयोजित हुआ।

अब, एक बार फिर, FIFA और AFC ने AIFF को 30 अक्टूबर की समय सीमा दी है। यदि इस तारीख तक नया संविधान नहीं अपनाया जाता है, तो निलंबन का खतरा फिर से मंडरा रहा है।

संभावित परिणाम:
यदि FIFA AIFF को निलंबित कर देता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं: भारतीय पुरुष और महिला फुटबॉल टीमें किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएँगी।
  • क्लबों पर असर: भारतीय क्लब जैसे मोहन बागान और मुंबई सिटी FC, जो AFC प्रतियोगिताओं में खेलते हैं, उन्हें भी इन टूर्नामेंट्स से बाहर किया जा सकता है।
  • ट्रेनिंग और फंड पर रोक: FIFA भारत में फुटबॉल के विकास के लिए दिए जाने वाले फंड को रोक सकता है, जिससे जमीनी स्तर पर ट्रेनिंग और विकास कार्य रुक जाएँगे।
  • विश्व कप पर प्रभाव: यदि कोई विश्व कप या अन्य अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट भारत में होने वाला है, तो उसे रद्द किया जा सकता है या किसी अन्य देश में स्थानांतरित किया जा सकता है।

आगे की राह:
इस संकट से निकलने के लिए AIFF को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। उन्हें सभी हितधारकों – क्लबों, राज्य संघों, और खिलाड़ियों – के साथ मिलकर एक नया संविधान तैयार करना होगा जो FIFA के नियमों के अनुरूप हो। इसके बाद, लोकतांत्रिक तरीके से एक नए निकाय का चुनाव करना होगा ताकि भारतीय फुटबॉल की स्वायत्तता सुनिश्चित की जा सके।

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