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By: Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने अपने जवानों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उपयोग को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। यह नीति 25 दिसंबर 2025 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग में जवानों को सूचनाओं से अवगत रखना है, साथ ही संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा और साइबर खतरों से बचाव सुनिश्चित करना है। नई नीति में इंस्टाग्राम को पहली बार शामिल किया गया है, लेकिन सख्त प्रतिबंधों के साथ। यह बदलाव सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के हालिया बयानों से भी जुड़ा है, जहां उन्होंने युवा सैनिकों के सोशल मीडिया उपयोग की चुनौतियों पर चर्चा की थी।

इंस्टाग्राम पर केवल देखने और निगरानी की अनुमति
नई गाइडलाइंस के तहत सेना के सभी रैंकों के जवान अब इंस्टाग्राम अकाउंट बना सकते हैं, लेकिन केवल “पैसिव ऑब्जर्वर” की भूमिका में। इसका मतलब है कि वे रील्स, फोटो, वीडियो या अन्य कंटेंट देख सकते हैं और निगरानी कर सकते हैं, लेकिन कोई सक्रिय भागीदारी नहीं। पोस्ट करना, कमेंट करना, लाइक करना, रिएक्ट करना, शेयर करना या मैसेज भेजना पूरी तरह प्रतिबंधित है। रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि इंस्टाग्राम का उपयोग सिर्फ सूचना संग्रह और मॉनिटरिंग के लिए होगा। अगर कोई फेक न्यूज या भ्रामक कंटेंट दिखे, तो उसे वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट किया जा सकता है।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले इंस्टाग्राम पर पूर्ण प्रतिबंध था। अब जवानों को डिजिटल दुनिया से जुड़े रहने की सीमित स्वतंत्रता मिली है, लेकिन अनुशासन और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

मैसेजिंग ऐप्स पर सामान्य जानकारी साझा करने की छूट
स्काइप, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर जवानों को गैर-संवेदनशील और सामान्य प्रकृति की जानकारी साझा करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, यह केवल उन लोगों के साथ ही संभव है जिनकी पहचान पूरी तरह सत्यापित हो। प्राप्तकर्ता की सही पहचान सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी उपयोगकर्ता पर होगी। कोई क्लासिफाइड या संवेदनशील डेटा शेयर करना सख्त मना है।

ये ऐप्स परिवार और दोस्तों से संपर्क बनाए रखने में मदद करेंगे, लेकिन दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।

यूट्यूब, एक्स, क्वोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पैसिव उपयोग
यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर), क्वोरा और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर केवल पैसिव भागीदारी की अनुमति है। जवानों को ज्ञान प्राप्त करने या जानकारी हासिल करने के लिए इनका उपयोग करने की छूट है, लेकिन खुद से बनाया गया कोई कंटेंट अपलोड करना, कमेंट करना या शेयर करना वर्जित है। लिंक्डइन का इस्तेमाल सिर्फ रिज्यूमे अपलोड करने या नौकरी संबंधी जानकारी लेने तक सीमित रखा गया है।

इसके अलावा, नीति में टोरेंट साइट्स, पायरेटेड सॉफ्टवेयर, वीपीएन, अनाम वेब प्रॉक्सी और फाइल शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स से दूर रहने की सलाह दी गई है। क्लाउड स्टोरेज का उपयोग भी अत्यधिक सावधानी से करने को कहा गया है।

क्यों जरूरी थी यह नई नीति?
पिछले कुछ वर्षों में साइबर खतरों में भारी वृद्धि हुई है। दुश्मन देशों की खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप या डेटा चोरी की कोशिशें करती रही हैं। 2020 में सेना ने फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित कई ऐप्स डिलीट करने के आदेश दिए थे। अब डिजिटल जागरूकता की जरूरत को देखते हुए नीति में संतुलन लाया गया है। सेना का कहना है कि यह कदम जवानों को आधुनिक दुनिया से जोड़े रखेगा, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाएगा।

जनरल द्विवेदी ने हालिया संवाद में कहा था कि सोशल मीडिया का उपयोग चुनौती है, लेकिन स्मार्टफोन से नहीं बल्कि कंटेंट पोस्ट करने के तरीके से। नई गाइडलाइंस इसी दिशा में एक कदम है, जो अनुशासन और जिम्मेदारी सिखाती है।

जवानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
सभी यूनिट्स और विभागों को ये निर्देश भेज दिए गए हैं। जवानों से अपील है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन करें। कोई उल्लंघन गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है। यह नीति सेना को डिजिटल युग में मजबूत और सतर्क बनाए रखने का प्रयास है। भारतीय सेना हमेशा से अनुशासन की मिसाल रही है, और यह नई पॉलिसी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है।

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