by-Ravindra Sikarwar
रूस में भारत के राजदूत श्री पवन कपूर ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा, खासकर तब जब उसे वहाँ से “सर्वोत्तम डील” मिल रही है। उन्होंने अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% के टैरिफ को “अनुचित, अतार्किक और अनुचित” बताया है। यह बयान उन भू-राजनीतिक दबावों के बीच आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी रूस पर यूक्रेन युद्ध के कारण प्रतिबंध लगा रहे हैं।
प्रमुख बिंदु और भारत का पक्ष:
श्री कपूर ने कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। उनका तर्क है कि भारत की विशाल आबादी और विकासशील अर्थव्यवस्था को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का रूस से तेल खरीदना किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कानून या प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं करता है।
- मूल्य और उपलब्धता: राजदूत ने कहा कि रूस ने भारत को रियायती दरों पर तेल की पेशकश की है, जो अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ है, खासकर जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें अस्थिर हैं।
- द्विपक्षीय संबंध: भारत और रूस के बीच दशकों से मजबूत रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सहयोग इस रिश्ते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- सार्वभौमिक अधिकार: श्री कपूर ने कहा कि किसी भी देश को यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं है कि दूसरा देश अपनी ऊर्जा कहां से खरीदेगा। यह एक संप्रभु निर्णय है।
अमेरिका के टैरिफ का विरोध:
राजदूत कपूर ने अमेरिका के टैरिफ को व्यापार और कूटनीति दोनों के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि एकतरफा टैरिफ लगाना कोई समाधान नहीं है और इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत दबाव में नहीं झुकेगा और अपनी आर्थिक और विदेश नीति अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही तय करेगा। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत इस मुद्दे पर अपनी स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
