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by-Ravindra Sikarwar

भारतीय वायु सेना (IAF) ने एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वह 114 ‘मेड इन इंडिया’ राफेल लड़ाकू विमान खरीदना चाहती है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगा। इस सौदे की अनुमानित लागत ₹2 लाख करोड़ से अधिक है।

समझौते का विवरण:
यह सौदा पारंपरिक खरीद से अलग है, क्योंकि यह भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है। इस परियोजना में फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण करेगी। यह सहयोग न केवल भारत में अत्याधुनिक लड़ाकू जेट बनाने की क्षमता विकसित करेगा, बल्कि इसमें भारतीय उद्योग की भागीदारी को भी बढ़ाएगा।

प्रमुख कारण और सामरिक महत्व:
राफेल जेट को चुनने का मुख्य कारण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इसकी असाधारण सफलता रही है। इस ऑपरेशन में राफेल ने अपनी उन्नत क्षमताओं और बहु-भूमिका (multi-role) प्रदर्शन को साबित किया है।

ये विमान भारतीय वायु सेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे। राफेल अपनी उन्नत विशेषताओं, जैसे कि लंबी दूरी की मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताएं और स्टील्थ तकनीक के लिए जाना जाता है। इस सौदे के तहत, इन जेट्स में काफी हद तक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जो भारतीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को एक बड़ा बढ़ावा देगा।

इस खरीद से भारत न केवल अपनी हवाई शक्ति बढ़ाएगा, बल्कि यह विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर भारत में ही उच्च तकनीक वाले उपकरण बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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