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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल में 3 दिसंबर का दिन हर साल उन हजारों जिंदगियों की याद दिलाता है जो 1984 की रात यूनियन कार्बाइड के जहरीले गैस रिसाव में अकाल मौत का शिकार हुई थीं। पूरी राजधानी में मातम का सन्नाटा रहता है। सुबह से शाम तक श्रद्धांजलि सभाएं, मौन जुलूस और सर्वधर्म प्रार्थनाएं होती हैं। इस दिन भोपाल में स्थानीय अवकाश भी घोषित रहता है। लेकिन इसी तारीख को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने प्रदेश मुख्यालय में एक बड़े और भव्य आयोजन का फैसला किया है, जिसमें नव-नियुक्त प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगी।

यह कार्यक्रम कोई साधारण पदभार समारोह नहीं होने वाला। सूत्रों के मुताबिक इंदौर से रीना बौरासी सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ सड़क मार्ग से भोपाल पहुंचेंगी। उनके साथ महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा भी पूरी यात्रा में साथ रहेंगी। भोपाल के प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय को भव्य सजावट से सजाया जा रहा है। मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार समेत पार्टी के तमाम बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे। सभी नेता सभा को संबोधित करेंगे और नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में महिला कांग्रेस को मजबूत करने का संकल्प दोहराएंगे।

इस आयोजन की तारीख को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। भोपाल गैस पीड़ितों से जुड़े संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता इसे संवेदनहीनता करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिस दिन पूरा शहर उन मासूमों को याद करके आंसू बहाता है, उसी दिन कांग्रेस मुख्यालय में उत्सव जैसा माहौल बनाना पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। दूसरी ओर कांग्रेस के प्रवक्ता इसे महज संयोग बता रहे हैं और कह रहे हैं कि संगठनात्मक कार्यों की अपनी समय-सारणी होती है, इसे त्रासदी की बरसी से जोड़कर देखना गलत है। फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतने बड़े आयोजन के लिए साल में कोई और तारीख नहीं चुनी जा सकती थी?

फिलहाल इंदौर में रीना बौरासी और उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है। सोशल मीडिया पर रैली की तैयारियों के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रहे हैं। लेकिन भोपाल में जैसे-जैसे 3 दिसंबर नजदीक आ रहा है, यह आयोजन राजनीतिक विवाद का केंद्र बनता जा रहा है। देखना यह है कि कांग्रेस इस मौके को महिला सशक्तिकरण के संदेश में बदल पाती है या गैस पीड़ितों की भावनाओं से जुड़ा यह विवाद पार्टी की छवि पर भारी पड़ता है।

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