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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक विवाह समारोह उस समय विवादों में घिर गया जब वरमाला की रस्म पूरी होने के बाद दुल्हन ने आगे की रस्मों से इनकार कर दिया। यह घटना 11 दिसंबर की है, जिसमें दूल्हा पक्ष का आरोप है कि दुल्हन के परिवार ने दूल्हे की शारीरिक स्थिति का हवाला देकर शादी रोक दी और फिर आर्थिक मांगें रखीं। इस विवाद के कारण पूरी बारात को बंधक बनाने का भी आरोप लगा है। अंत में बारात बिना दुल्हन के निराश होकर वापस लौट गई। दूल्हा पक्ष ने इस मामले में पुलिस से शिकायत दर्ज कराई है और जांच चल रही है।

यह मामला जनकगंज थाना क्षेत्र का है। दूल्हे का नाम प्रशांत कुशवाह बताया जा रहा है, जो नादरिया का निवासी है। उसके पिता लोटन कुशवाह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। उनके अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले बेलदार का पुरा निवासी धर्मजीत कोठारी की बेटी से रिश्ता तय हुआ था। दोनों परिवारों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था और शादी की तारीख 11 दिसंबर तय की गई। तय समय पर बारात लेकर दूल्हा पक्ष लड़की के घर पहुंचा। वहां उत्साहपूर्ण माहौल में स्वागत हुआ और स्टेज पर वरमाला की रस्म भी पूरी हो गई। सभी को लग रहा था कि अब सात फेरे और अन्य रस्में जल्द ही संपन्न हो जाएंगी।

लेकिन वरमाला के बाद अचानक माहौल बदल गया। दुल्हन मंडप में सात फेरों के लिए नहीं आई। जब दूल्हा पक्ष ने दुल्हन के परिवार से इस बारे में पूछा तो जवाब मिला कि दूल्हा शारीरिक रूप से अक्षम है, इसलिए शादी नहीं हो सकती। दूल्हा पक्ष ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया और समझाने की कोशिश की कि प्रशांत पूरी तरह स्वस्थ है और कोई दिव्यांगता नहीं है। परिवार वालों ने काफी मान-मनौवल किया, लेकिन दुल्हन के पिता नहीं माने।

इसके बाद मामला और बिगड़ गया। दूल्हा पक्ष का आरोप है कि दुल्हन के पिता ने शादी में हुए खर्च की भरपाई के नाम पर 10 लाख रुपये की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि इतना पैसा खर्च हो चुका है, इसलिए यह रकम लौटानी होगी। जब दूल्हा पक्ष ने पैसे देने से इनकार किया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप लगाया गया है कि दुल्हन के परिवार और रिश्तेदारों ने जनरेटर हाउस या विवाह स्थल पर दोनों तरफ से घेराबंदी कर पूरी बारात को कई घंटों तक बंधक बना लिया। बाराती डरे-सहमे रहे और बाहर निकलने की कोशिश भी नहीं कर सके।

दूल्हे के भाई ने बताया कि काफी प्रयासों के बाद भी बात नहीं बनी। अंत में मजबूरी में दुल्हन पक्ष को 9 लाख रुपये दिए गए, तभी जाकर बारात को छोड़ा गया। यह रकम देने के बाद भी दुल्हन शादी के लिए तैयार नहीं हुई और बारात को खाली हाथ लौटना पड़ा। पूरी घटना से बारातियों में गुस्सा और निराशा थी। वे रात भर की यात्रा करके आए थे, लेकिन बिना विवाह के वापस जाना पड़ा।

इस पूरे प्रकरण ने समाज में एक बार फिर विवाह जैसे पवित्र बंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां दूल्हा पक्ष का कहना है कि उन्हें धोखा दिया गया और आर्थिक शोषण किया गया, वहीं इस तरह की घटनाएं विवाह संस्था की विश्वसनीयता पर असर डालती हैं। पुलिस ने दूल्हा पक्ष की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और दोनों पक्षों के बयान लेकर जांच आगे बढ़ा रही है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में क्या वजह रही शादी टूटने की और किसने क्या गलती की।

ऐसी घटनाएं मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में समय-समय पर सामने आती रहती हैं। कभी दहेज की मांग, कभी शारीरिक या आर्थिक स्थिति का बहाना, तो कभी अन्य कारणों से विवाह अंतिम क्षणों में टूट जाते हैं। इससे न केवल दोनों परिवारों को मानसिक और आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि समाज में अविश्वास भी बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिश्ते तय करने से पहले पारदर्शिता और पूर्ण जांच जरूरी है। साथ ही, कानूनी रूप से ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की जरूरत है ताकि कोई भी पक्ष अनुचित लाभ न उठा सके।

फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। उम्मीद है कि सच जल्द सामने आएगा और न्याय होगा।

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