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by-Ravindra Sikarwar

सैंटियागो: चिली के एक ऑफिस सहायक को उसकी कंपनी ने मई 2022 में पेयरोल त्रुटि के कारण उसके मासिक वेतन का लगभग 330 गुना अधिक राशि हस्तांतरित कर दी, जिसके बाद उसने तुरंत नौकरी से इस्तीफा दे दिया। तीन साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद सैंटियागो की अदालत ने फैसला सुनाया कि यह चोरी नहीं बल्कि ‘अनधिकृत संग्रह’ का मामला है, जिससे कर्मचारी को आपराधिक मुकदमे से मुक्ति मिल गई और वह राशि रखने का हकदार ठहराया गया। हालांकि, कंपनी ने फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का ऐलान किया है।

कर्मचारी, जो चिली के प्रमुख खाद्य उत्पादन कंपनी ‘डैन कंसोरसियो इंडस्ट्रियल डे अलिमेंटोस डे चिली’ (Dan Consorcio Industrial de Alimentos de Chile) में कार्यरत था, सामान्य रूप से प्रति माह 500,000 चिलियन पेसो (लगभग 386 पाउंड या 40,000 रुपये) कमाता था। लेकिन मई 2022 में कंपनी की ओर से हुई गलती से उसके बैंक खाते में 165 मिलियन चिलियन पेसो (लगभग 127,000 पाउंड या 1.35 करोड़ रुपये) जमा हो गए। यह राशि उसके सामान्य वेतन से 330 गुना अधिक थी, जो कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी पेयरोल चूक साबित हुई।

घटना के तुरंत बाद कर्मचारी ने अपने डिप्टी मैनेजर को इस त्रुटि की सूचना दी। कंपनी ने जल्द ही मानव संसाधन विभाग के माध्यम से संपर्क किया और कर्मचारी से राशि लौटाने का अनुरोध किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारी ने शुरुआत में सहमति जताई और राशि वापस करने पर राजी हो गया। लेकिन मात्र तीन दिन बाद, उसने अपना इस्तीफा सौंप दिया और संपर्क से गायब हो गया। कंपनी ने इसे चोरी का मामला मानते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि कर्मचारी ने जानबूझकर राशि हड़प ली। यदि दोषी पाया जाता, तो उसे जुर्माना और 540 दिनों तक की जेल की सजा हो सकती थी।

तीन वर्षों तक चले मुकदमे में अदालत ने गहन जांच की। जज ने फैसला दिया कि कर्मचारी ने कंपनी को त्रुटि की सूचना दी थी और प्रारंभिक रूप से राशि लौटाने की बात कही थी, इसलिए इसे चोरी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसके बजाय, अदालत ने इसे ‘अनधिकृत संग्रह’ करार दिया, जो चिली के कानून के तहत आपराधिक अपराध नहीं माना जाता। इस फैसले के परिणामस्वरूप, अदालत ने कर्मचारी को आपराधिक अभियोजन से छूट दे दी, जिसका मतलब है कि वह राशि को वैध रूप से रख सकता है। जज ने स्पष्ट किया कि कंपनी की गलती से हुई यह राशि कर्मचारी की ओर से धोखाधड़ी नहीं थी, क्योंकि उसने तुरंत सूचना दी थी।

कंपनी के अधिकारियों ने फैसले पर असंतोष जताते हुए डियारियो फिनान्सिएरो को दिए बयान में कहा, “हम सभी संभावित कानूनी कदम उठाएंगे, विशेष रूप से फैसले की समीक्षा के लिए रद्दीकरण की अपील दायर करेंगे।” कंपनी का दावा है कि सिविल मुकदमे के जरिए वह राशि वसूलने का प्रयास जारी रखेगी, क्योंकि यह उनकी संपत्ति है। लेकिन फिलहाल, कर्मचारी के पक्ष में फैसला मजबूत दिख रहा है, और वह राशि को अपने पास रखने का कानूनी अधिकार प्राप्त कर चुका है।

यह घटना कार्यस्थल पर पेयरोल प्रणालियों की कमजोरियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी त्रुटियां दुर्लभ हैं, लेकिन जब होती हैं तो कानूनी जटिलताएं पैदा कर देती हैं। चिली के श्रम कानूनों के अनुसार, यदि कर्मचारी को गलत राशि मिलने की जानकारी हो और वह उसे लौटाने से इनकार कर दे, तो यह सिविल विवाद बन जाता है, न कि आपराधिक मामला। इसी तरह की एक घटना यूरोप में भी सामने आई, जहां एक जर्मन शिक्षिका ने 16 वर्षों तक बीमारी की छुट्टी पर रहते हुए पूरा वेतन वसूला, और अब उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है। दक्षिण अफ्रीका में भी एक महिला को 85 पाउंड के बजाय 850,000 पाउंड मिले, जिसे उसने ‘ईश्वर का उपहार’ बताकर खर्च कर दिया।

कंपनी ने कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है और अपनी पेयरोल प्रक्रिया में सुधार का वादा किया है। इस मामले ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, जहां कई लोग कर्मचारी के फैसले की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे नैतिक रूप से गलत बता रहे हैं। वर्तमान में, कर्मचारी की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन यह कहानी वित्तीय गलतियों और कानूनी लड़ाइयों का एक रोचक उदाहरण बन चुकी है।

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