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by-Ravindra Sikarwar

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% तक के टैरिफ लगाए जाने की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। इस खबर का नकारात्मक असर आज बाजार खुलते ही दिखाई दिया, और दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

यह फैसला भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद जारी रखने के कारण लिया गया है, और ट्रंप प्रशासन ने इसे यूक्रेन युद्ध के जवाब के रूप में पेश किया है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस कदम को “अन्यायपूर्ण, अनुचित और अतार्किक” करार दिया है और कहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

टैरिफ की पृष्ठभूमि और आर्थिक प्रभाव:

  • बढ़ता टैरिफ: भारत से आयात पर पहले से ही 25% शुल्क लगने वाला था, लेकिन अब एक कार्यकारी आदेश के तहत इसमें अतिरिक्त 25% का टैरिफ जोड़ा गया है, जिससे कुल शुल्क बढ़कर 50% हो गया है।
  • आर्थिक दबाव: टैरिफ का सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ेगा, जिससे विशेष रूप से कपड़ा, ऑटोमोबाइल और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी मांग घट सकती है।
  • निवेशकों की चिंता: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ वृद्धि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में तनाव को बढ़ा सकती है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है। बाजार में चल रही गिरावट इसी चिंता का परिणाम है।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह:
भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया है कि भारत की ऊर्जा ज़रूरतें 1.4 अरब लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, और रूस से तेल खरीदना एक वाणिज्यिक फैसला है।

सरकार फिलहाल इस समस्या से निपटने के लिए कई रणनीतियों पर विचार कर रही है। इनमें निर्यातकों के लिए ऋण की लागत को कम करना और अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाने के लिए प्रयास करना शामिल है। यह देखना बाकी है कि दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत किस दिशा में जाती है, लेकिन फिलहाल बाजार और सरकार दोनों ही इस टैरिफ के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।

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