By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: मध्यप्रदेश में बारिश के मौसम से पहले एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। रायसेन जिले में हाल ही में हुए दिल दहला देने वाले पुल हादसे के बाद प्रदेश का लोक निर्माण विभाग (PWD) पूरी तरह हरकत में आ गया है। विभाग ने प्रदेश भर में फैले 45 अति जर्जर और खतरनाक हालत वाले पुलों की तुरंत मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए विशेष फंड जारी कर दिया है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में पुलों की एक साथ मरम्मत की स्वीकृति एकसाथ दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पहले सभी 45 पुलों का काम शुरू हो जाएगा ताकि फिर कोई अनहोनी न हो।
रायसेन जिले के सिलवानी क्षेत्र में कुछ दिन पहले एक पुराना पुल अचानक भरभरा कर गिर गया था। गनीमत रही कि उस वक्त पुल पर कोई भारी वाहन या लोग नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो जाता। इस घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया और PWD मंत्री को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जर्जर पुलों की तुरंत पहचान कर उनकी मरम्मत कराई जाए। इसके बाद विभाग ने सर्वे करवाया और 45 ऐसे पुल चिह्नित किए जो सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति में थे।
PWD के प्रमुख अभियंता ने बताया कि इन 45 पुलों में से कई तो दशकों पुराने हैं और इन पर भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा है। कुछ पुल तो ऐसे हैं जिनकी डिज़ाइन लोडिंग क्षमता बहुत कम रह गई है, जबकि इन पर ट्रक, बस और भारी मालवाहक वाहन गुजर रहे हैं। कुछ पुलों में दरारें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। इनमें मध्यप्रदेश के कई प्रमुख मार्गों पर स्थित पुल भी शामिल हैं।
इन जिलों के पुलों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता
सूची में सबसे ज्यादा पुल रायसेन, विदिशा, भोपाल, होशंगाबाद, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, नर्मदापुरम और बैतूल जिले के हैं। इनके अलावा सीहोर, रायसेन-भोपाल मार्ग, सागर, दमोह और छिंदवाड़ा के भी कई पुल शामिल हैं। कुछ पुल तो नदियों पर बने हैं जो बरसात में जलस्तर बढ़ने पर सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
कितना फंड और कब तक काम पूरा होगा?
PWD ने इन 45 पुलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए करीब 180 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मंजूर किया है। कुछ पुलों की केवल मरम्मत होगी, जबकि कई पुराने पुलों को पूरी तरह तोड़कर नये सिरे से बनाया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि जून 2026 से पहले अधिकांश पुलों का काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन मानसून से पहले सभी पुलों पर कम से कम अस्थायी मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम जरूर पूरा हो जाएगा।
लोगों में राहत, पर सवाल भी बाकी
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और यात्री इस फैसले से काफी राहत महसूस कर रहे हैं। कई लोग वर्षों से इन जर्जर पुलों से गुजरते वक्त डर के साए में रहते थे। अब उम्मीद है कि आने वाले मानसून में पहले जैसे हादसे नहीं होंगे। हालांकि कुछ सामाजिक संगठन और विपक्षी दल यह सवाल भी उठा रहे हैं कि आखिर इतने सालों तक इन पुलों की हालत खराब क्यों होने दी गई? क्या पहले कोई सर्वे नहीं हुआ था? उनका कहना है कि हादसे के बाद जागना ठीक है, लेकिन पहले से सतर्क रहना ज्यादा जरूरी था।
फिलहाल PWD ने ठेकेदारों को काम शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। कई जगहों पर मशीनरी और मजदूर पहुंचने भी शुरू हो गए हैं। विभाग ने यह भी ऐलान किया है कि अब हर साल मानसून से पहले सभी पुलों और सड़कों का विशेष सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होगा।
मध्यप्रदेश के लिए यह कदम निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। उम्मीद की जानी चाहिए कि समय पर काम पूरा होगा और प्रदेश के लोग सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे।
