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by-Ravindra Sikarwar

भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख, एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने हाल ही में मिग-21 लड़ाकू विमान को एक प्रतीकात्मक और भावुक विदाई दी। उन्होंने राजस्थान के नाल एयरबेस से 18 और 19 अगस्त को इस ऐतिहासिक विमान में एकल उड़ान (सोलो सॉर्टी) भरी, जिसने 62 वर्षों तक भारतीय वायु सेना की सेवा की।

यह उड़ान सिर्फ एक औपचारिक विदाई नहीं थी, बल्कि यह भारतीय वायु सेना और उन सभी पीढ़ियों के पायलटों के लिए एक भावनात्मक क्षण था, जिन्होंने इस रूसी-मूल के विमान पर प्रशिक्षण लिया और देश की सेवा की।

एक लंबी और गौरवशाली सेवा:
मिग-21 ने 1960 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायु सेना में अपनी सेवा शुरू की थी। इस विमान ने 1965 और 1971 के युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई मौकों पर देश की वायु सीमाओं की रक्षा की। अपनी तेज गति, बेहतरीन प्रदर्शन और बहुमुखी प्रतिभा के कारण इसे “रीढ़ की हड्डी” भी कहा जाता था।

पिछले कुछ वर्षों में, मिग-21 विमानों से जुड़ी दुर्घटनाओं के कारण इसकी सुरक्षा पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद, भारतीय वायु सेना ने धीरे-धीरे इसे अपने बेड़े से हटाने का फैसला किया। वायु सेना अब मिग-21 की जगह पर स्वदेशी तेजस विमानों को शामिल कर रही है, जो आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा सुविधाओं से लैस हैं।

IAF प्रमुख की भावुक विदाई:
वायु सेना प्रमुख के रूप में, एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने खुद इस विमान को उड़ाकर इसे अंतिम सलामी दी। उनकी यह उड़ान न केवल मिग-21 के गौरवशाली इतिहास को याद करती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि भारतीय वायु सेना अब एक नए और आधुनिक युग में प्रवेश कर रही है, जहाँ स्वदेशी तकनीक पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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