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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। यहां के रानापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पड़ावदा गांव में मंगलवार दोपहर करीब 4:30 बजे एक 23 वर्षीय युवक ने अपनी पत्नी पर अविश्वास का शक पालकर उसकी नाक को ब्लेड से काट दिया। यह कृत्य न केवल एक पारिवारिक विवाद का परिणाम था, बल्कि लिंग हिंसा और मानसिक तनाव की गहराई को उजागर करता है। पीड़िता को गंभीर चोटें आई हैं, और डॉक्टरों ने प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता बताई है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, लेकिन यह घटना महिलाओं की सुरक्षा और वैवाहिक संबंधों में संवाद की कमी पर सवाल खड़े कर रही है।

घटना का पूरा विवरण और पृष्ठभूमि:
झाबुआ जिला, जो मध्य प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है, आदिवासी समुदायों का प्रमुख केंद्र है। यहां की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना में पारंपरिक मूल्य मजबूत हैं, लेकिन आधुनिक चुनौतियां जैसे बेरोजगारी, शिक्षा की कमी और पारिवारिक तनाव भी आम हैं। आरोपी राकेश (23 वर्ष) और उसकी पत्नी (नाम अज्ञात, उम्र लगभग 20-22 वर्ष) का विवाह करीब दो वर्ष पूर्व हुआ था। दंपति मूल रूप से पड़ावदा गांव के निवासी हैं, जहां कृषि और छोटे-मोटे दैनिक मजदूरी पर जीवन चलता है।

पुलिस जांच के अनुसार, राकेश को लंबे समय से अपनी पत्नी पर बेवफाई का संदेह था। वह मानता था कि पत्नी किसी अन्य पुरुष से गुप्त रूप से संपर्क में है, हालांकि कोई ठोस सबूत नहीं मिला। यह शक दंपति के बीच बार-बार झगड़ों का कारण बनता रहा। मंगलवार को, राकेश अपनी पत्नी के साथ झाबुआ शहर गया था, शायद दैनिक खरीदारी या किसी पारिवारिक काम के लिए। रास्ते में दोनों के बीच फिर से बहस छिड़ गई, जो चरित्र संबंधी आरोपों पर केंद्रित थी। गुस्से में आकर राकेश ने पत्नी को गांव वापस ला दिया।

घर पहुंचते ही विवाद भड़क उठा। राकेश ने अपनी जेब से एक तेज धार वाला रेजर ब्लेड निकाला और पत्नी पर हमला बोल दिया। उसने पहले पत्नी के गले को दबाया, फिर ब्लेड से उसकी नाक पर वार किया, जिससे नाक का एक हिस्सा पूरी तरह कट गया। क्रोध में वह इतना उन्मत्त हो गया कि पत्नी की उंगलियों पर भी कई वार किए, जिससे गहरी चोटें लगीं। पीड़िता खून से लथपथ हो गई और दर्द से चीखने लगी। घटना के बाद, राकेश को होश आया तो उसने खुद ही पत्नी को अपनी बाइक पर लादकर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद पीड़िता को झाबुआ जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि कटा हुआ नाक का हिस्सा जमीन पर गिर गया, और गांव के कुछ आवारा जानवरों ने उसे निगल लिया। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संग्रह किया, लेकिन कटा हिस्सा बरामद न होने से पुनर्स्थापना की प्रक्रिया जटिल हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि नाक की मरम्मत के लिए उन्नत प्लास्टिक सर्जरी जरूरी होगी, जो इंदौर या भोपाल के बड़े अस्पतालों में ही संभव है।

आरोपी की मानसिकता और पूछताछ के खुलासे:
रानापुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, राकेश ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि “वह पत्नी को सबक सिखाना चाहता था, ताकि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो।” यह बयान न केवल आरोपी की विकृत सोच को दर्शाता है, बल्कि समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक मानसिकता का भी प्रतिबिंब है। राकेश एक दैनिक मजदूर है, जिसकी शिक्षा सीमित है, और गांव में कोई स्थायी रोजगार नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव शक को हिंसा में बदल देते हैं।

पुलिस ने आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 326 (गंभीर चोट पहुंचाना) और डाउनरी निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को मंगलवार शाम ही गिरफ्तार कर लिया गया, और बुधवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच अधिकारी ने बताया कि पीड़िता के बयान पर और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि कोई अन्य पहलू सामने न आए।

पीड़िता का परिवार और सामाजिक प्रतिक्रिया:
पीड़िता के परिवार में उसके माता-पिता और दो छोटे भाई-बहन हैं, जो गांव में ही रहते हैं। घटना की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। कुछ स्थानीय महिलाओं ने थाने का घेराव किया और आरोपी को कड़ी सजा की मांग की। झाबुआ जिला प्रशासन ने पीड़िता को मुफ्त चिकित्सा सुविधा का आश्वासन दिया है, और महिला एवं बाल विकास विभाग ने परिवार को आर्थिक सहायता का वादा किया।

यह घटना मध्य प्रदेश में बढ़ती घरेलू हिंसा की एक कड़ी है। राज्य में पिछले एक वर्ष में ऐसे 500 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें अधिकांश अविश्वास या दहेज से जुड़े हैं। एनजीओ ‘महिला हेल्पलाइन’ की एक प्रतिनिधि ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, जहां पुरुषों को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए काउंसलिंग दी जाए। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की निंदा हो रही है, जहां #JusticeForJhabuaVictim जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

कानूनी और सामाजिक निहितार्थ:
यह कांड महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ चल रहे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूत करता है। भारत सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘मिशन शक्ति’ जैसी योजनाओं के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में क्रियान्वयन की कमी साफ दिखाई देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैवाहिक विवादों के लिए स्थानीय स्तर पर मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने चाहिए। झाबुआ के कलेक्टर ने एक बयान जारी कर कहा कि जिला प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएगा, जिसमें गांव-स्तरीय जागरूकता शिविर शामिल हैं।

पीड़िता की रिकवरी लंबी होगी, लेकिन यह घटना समाज को आईना दिखाती है कि संदेह को हिंसा में बदलने से पहले संवाद और सहायता की तलाश जरूरी है। आरोपी की सजा से न केवल न्याय मिलेगा, बल्कि अन्य संभावित अपराधियों के लिए चेतावनी भी बनेगी। झाबुआ पुलिस ने अपील की है कि ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत दें, ताकि समय पर हस्तक्षेप हो सके।

यह दुखद घटना हमें याद दिलाती है कि घर की चारदीवारी के अंदर भी महिलाओं का जीवन असुरक्षित हो सकता है, और समाज को मिलकर इसे बदलना होगा।

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