by-Ravindra Sikarwar
राजकोट: गुजरात के राजकोट शहर में स्थित पायल मेटरनिटी होम में एक साधारण तकनीकी चूक ने पूरे देश को झकझोर देने वाला साइबर घोटाला उजागर कर दिया है। अस्पताल के सीसीटीवी सिस्टम में इस्तेमाल किया गया डिफॉल्ट पासवर्ड ‘एडमिन123’ हैकर्स के लिए खुला निमंत्रण साबित हुआ, जिसके जरिए उन्होंने स्त्री रोग विभाग में महिलाओं के चेकअप के दौरान रिकॉर्ड हुई संवेदनशील वीडियो रिकॉर्डिंग्स चुरा लीं। ये वीडियो न केवल टेलीग्राम ग्रुप्स पर बेचे गए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोर्न नेटवर्क में भी फैला दिए गए, जिससे कम से कम 50,000 क्लिप्स का अवैध व्यापार फल-फूल उठा। यह घटना न केवल महिलाओं की गोपनीयता का घोर उल्लंघन है, बल्कि भारत भर में साइबर सुरक्षा की लापरवाही को भी आईना दिखाती है।
घटना का खुलासा कैसे हुआ:
यह कांड फरवरी 2025 में तब सामने आया जब ‘मेघा एमबीबीएस’ और ‘सीपी मोन्दा’ जैसे यूट्यूब चैनलों पर अस्पताल से चुराई गई टीजर क्लिप्स अपलोड की गईं। इन छोटे वीडियो में महिलाओं को विभिन्न अवस्थाओं में दिखाया गया था, जो दर्शकों को टेलीग्राम चैनलों की ओर मोड़ते थे। वहां पूर्ण वीडियो को 700 से 4,000 रुपये प्रति क्लिप के भाव पर बेचा जा रहा था। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत बयान जारी कर कहा कि उनका सीसीटीवी सर्वर हैक हो गया है, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। जांच में पता चला कि ये वीडियो जून 2025 तक भी ऑनलाइन उपलब्ध थे, जिससे पीड़ित महिलाओं का मानसिक आघात और गहरा हो गया।
प्रत्यक्षदर्शी और प्रभावित परिवारों ने बताया कि वीडियो में महिलाओं को गायनेकोलॉजिकल जांच के दौरान कैमरे में कैद किया गया था, जहां वे अपनी सबसे नाजुक स्थिति में थीं। एक पीड़िता के पति ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारी पत्नी का वीडियो देखकर हमारा पूरा परिवार टूट गया। यह सिर्फ गोपनीयता का उल्लंघन नहीं, बल्कि हमारी जिंदगी का अपमान है।” इस घटना ने पूरे राजकोट में आक्रोश की लहर पैदा कर दी, और स्थानीय महिलाओं ने अस्पताल के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
हैकिंग की साजिश: एक कमजोर पासवर्ड कैसे बन गया हथियार
जांच एजेंसियों के अनुसार, मुख्य आरोपी 25 वर्षीय बीकॉम ग्रेजुएट परीत धामेलिया ने तीन सॉफ्टवेयर टूल्स—suIP.biz, Masscan और SWC सॉफ्टवेयर—का इस्तेमाल करके कमजोर सिस्टम्स की तलाश की। इन टूल्स ने इंटरनेट पर खुले आईपी एड्रेस को स्कैन किया, डिजिटल पोर्ट्स की जांच की और लॉगिन क्रेडेंशियल्स चुराए। राजकोट अस्पताल का सीसीटीवी डैशबोर्ड ‘एडमिन123’ जैसे फैक्ट्री डिफॉल्ट पासवर्ड से सुरक्षित था, जो हैकर्स के लिए आसान शिकार था।
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया, “हैकर्स ने ‘ब्रूट फोर्स अटैक’ का सहारा लिया, जिसमें एक प्रोग्राम या बॉट हर संभावित अक्षरों और नंबर्स के कॉम्बिनेशन को आजमाता है। ‘एडमिन123’ जैसा सामान्य पासवर्ड कुछ ही मिनटों में क्रैक हो जाता है।” एक बार एक्सेस मिलने के बाद, आरोपी रोहित सिसोदिया—जो खुद को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी डिप्लोमा धारक बताता था—ने DMSS ऐप के जरिए रिमोट एक्सेस लिया और घंटों की रिकॉर्डिंग डाउनलोड कर ली। ये क्लिप्स फिर डार्क वेब और टेलीग्राम पर अपलोड हो गईं, जहां विदेशी खरीदारों तक पहुंचीं।
राष्ट्रीय स्तर पर फैली यह साजिश:
यह सिर्फ राजकोट तक सीमित नहीं थी। जांच में 20 राज्यों में 80 से अधिक सीसीटीवी डैशबोर्ड्स के हैक होने का खुलासा हुआ, जिनमें पुणे, मुंबई, नासिक, सूरत, अहमदाबाद, दिल्ली जैसे शहर शामिल हैं। हैकर्स ने अस्पतालों के अलावा स्कूलों, कॉर्पोरेट ऑफिसों, सिनेमा हॉल्स, फैक्टरियों और निजी घरों के फीड्स को भी निशाना बनाया। नौ महीनों में चुराई गई 50,000 क्लिप्स का अनुमानित मूल्य करोड़ों रुपये का है। गुजरात पुलिस की सीआईडी-क्राइम ने छह लोगों को गिरफ्तार किया, जो लगभग 100 ‘म्यूल’ बैंक खातों के जरिए 200 करोड़ रुपये दुबई-आधारित साइबर अपराधियों को ट्रांसफर कर रहे थे। म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अवैध फंड्स को लॉन्डर करने के लिए किया जाता है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि देश भर में लाखों सीसीटीवी सिस्टम अभी भी डिफॉल्ट पासवर्ड्स पर चल रहे हैं, जो एक बड़ा खतरा हैं। एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी, “यह घटना दिखाती है कि एक छोटी सी लापरवाही कैसे लाखों लोगों की प्राइवेसी को खतरे में डाल सकती है। मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होने चाहिए।”
कानूनी कार्रवाई और प्रभाव:
गुजरात पुलिस ने आईपीसी की धारा 354सी (वॉयरिज्म), 66सी (पहचान चोरी) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों में परीत धामेलिया, रोहित सिसोदिया और अन्य शामिल हैं, जिन्हें रिमांड पर लिया गया है। अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही का आरोप लगाया गया है, और स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य के मेडिकल संस्थानों में साइबर ऑडिट के आदेश दिए हैं।
यह घोटाला महिलाओं की सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता पर सवाल खड़े करता है। संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन ने भी इसकी निंदा की है, कहा कि “ऐसी घटनाएं लिंग-आधारित हिंसा को बढ़ावा देती हैं।” प्रभावित महिलाओं के लिए काउंसलिंग और कानूनी सहायता की व्यवस्था की जा रही है।
सबक और सावधानियां:
इस घटना से सीख मिलती है कि संस्थानों को तुरंत पासवर्ड बदलना चाहिए, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट रखना चाहिए और साइबर ट्रेनिंग आयोजित करनी चाहिए। आम नागरिकों को भी अपने डिवाइसेस पर मजबूत सिक्योरिटी अपनानी चाहिए। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। यह कांड भारत की डिजिटल दुनिया में एक चेतावनी है कि सुरक्षा की दीवारें कितनी नाजुक हो सकती हैं। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं, और उम्मीद है कि सख्त कार्रवाई से भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी।
