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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मदनगिर क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। मंगलवार तड़के (8 अक्टूबर, 2025) को एक 28 वर्षीय फार्मास्युटिकल कंपनी के कर्मचारी पर उसकी पत्नी ने कथित तौर पर सोते समय उबलते तेल से हमला किया और उसके घावों पर लाल मिर्च पाउडर छिड़क दिया। पीड़ित को गंभीर जलनें आईं, और वह वर्तमान में सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जो वैवाहिक कलह से प्रेरित लग रही है। यह घटना घरेलू हिंसा के गंभीर रूप को उजागर करती है, जहां एक सामान्य रात्रि भयानक त्रासदी में बदल गई।

घटना का क्रमबद्ध विवरण:
घटना मंगलवार रात्रि से बुधवार तड़के के बीच घटी। पीड़ित, जिनका नाम दिनेश कुमार है, अपनी पत्नी शादना और आठ वर्षीय बेटी के साथ मदनगिर के एक छोटे से फ्लैट में रहते थे। दिनेश ने अपनी शिकायत में बताया कि वह और उनकी पत्नी-पुत्री पास-पास सो रही थीं। रात करीब 3:15 बजे, अचानक उसके शरीर पर तेज जलन महसूस हुई। आंखें खोलते ही उसने देखा कि शादना उसके ऊपर खड़ी होकर उबलता हुआ तेल उसके धड़ और चेहरे पर उड़ेल रही थी। हमले की तीव्रता इतनी थी कि दिनेश चीख पड़े, लेकिन इससे पहले ही शादना ने उसके ताजा घावों पर लाल मिर्च पाउडर छिड़क दिया, जिससे दर्द कई गुना बढ़ गया।

दिनेश की शिकायत के अनुसार, जब वह उठने या मदद मांगने की कोशिश करने लगे, तो शादना ने उन्हें धमकाया: “अगर शोर मचाया तो और गर्म तेल डाल दूंगी।” यह धमकी इतनी भयावह थी कि दिनेश कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। घर में उनकी आठ वर्षीय बेटी भी मौजूद थी, जो इस पूरी घटना का गवाह बनी। दिनेश ने आरोप लगाया कि हमले के बाद शादना ने घर का दरवाजा बंद कर लिया और उनका फोन छीन लिया, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। यह क्रूरता न केवल शारीरिक यातना थी, बल्कि मानसिक आघात भी दे गई।

पड़ोसियों का हस्तक्षेप और अस्पताल पहुंच:
दिनेश की चीखें सुनकर पड़ोसी जाग उठे। पड़ोस की एक महिला, अंजलि (नाम परिवर्तित), ने बताया कि रात के सन्नाटे में अचानक आई चीखें इतनी भयानक थीं कि पूरा मोहल्ला हिल गया। “हमने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। जब आखिरकार दरवाजा खुला, तो दिनेश दर्द से कराहते हुए बाहर आए, और शादना अंदर छिपी हुई थी,” अंजलि ने कहा। पड़ोसियों ने तुरंत दिनेश को एक ऑटो में बिठाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। अंजलि के पिता ने जब हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो शादना ने झूठा बहाना बनाया कि वह पति को अस्पताल ले जा रही है। लेकिन वह गलत दिशा में गईं, जिससे संदेह हुआ।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दिनेश की हालत को “खतरनाक” बताया। उनके धड़, चेहरे और ऊपरी शरीर पर गंभीर जलनें हैं, जो उबलते तेल और मिर्च पाउडर के संयोजन से और जटिल हो गई हैं। आईसीयू में भर्ती दिनेश को तत्काल उपचार दिया जा रहा है, लेकिन उनकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने दिनेश के बयान के आधार पर अंबेडकर नगर थाने में धारा 307 (हत्या का प्रयास), 326 (कारण बताए बिना गंभीर चोट पहुंचाना) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

वैवाहिक कलह की पृष्ठभूमि:
दंपति की शादी को आठ वर्ष हो चुके थे, लेकिन पिछले कुछ समय से उनके बीच घरेलू झगड़े बढ़ गए थे। दिनेश ने शिकायत में उल्लेख किया है कि शादना अक्सर छोटी-मोटी बातों पर विवाद करती थीं और हिंसक हो जाती थीं। पड़ोसियों के अनुसार, झगड़े की आवाजें आना आम बात हो गई थी, लेकिन किसी ने कभी इतनी हिंसा की कल्पना नहीं की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि शादना मानसिक तनाव में थीं, लेकिन हमले का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। क्या यह पुरानी नाराजगी का परिणाम था या कोई तात्कालिक विवाद, इसकी गहन पूछताछ की जा रही है।

शादना को गिरफ्तार कर लिया गया है, और पूछताछ जारी है। पुलिस उनकी बेटी से भी बात करने की कोशिश कर रही है, लेकिन बच्ची के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरती जा रही है। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि घरेलू हिंसा के उन रूपों को भी उजागर करती है, जो अक्सर छिपे रहते हैं।

पुलिस जांच और सामाजिक प्रभाव:
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल का साक्ष्य संग्रहण किया गया है, जिसमें घर से बरामद तेल का बर्तन और मिर्च पाउडर के अवशेष शामिल हैं। फोरेंसिक टीम भी लगी हुई है, और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। अधिकारी ने कहा, “यह एक गंभीर मामला है, और हम पूरी संवेदनशीलता के साथ जांच कर रहे हैं। घरेलू हिंसा के शिकार पुरुषों के लिए भी समर्थन प्रणाली मजबूत करने की जरूरत है।”

यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां लोग इसे घरेलू हिंसा के लिंग-तटस्थ पहलू पर बहस का विषय बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और पारिवारिक परामर्श की कमी को दर्शाती हैं। दिल्ली महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और बेटी के कल्याण के लिए कदम उठाने की घोषणा की है।

निष्कर्ष: हिंसा का अंत और जागरूकता की शुरुआत:
यह भयानक हमला एक सामान्य परिवार को बर्बाद करने वाली हिंसा का प्रतीक है, जहां एक रात्रि की नींद जीवन-भर के दर्द में बदल गई। दिनेश की बेटी, जो इस त्रासदी की चुपचाप गवाह बनी, अब मनोवैज्ञानिक सहायता की जरूरत है। ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दंपति समय पर परामर्श लें और झगड़ों को हिंसा में न बदलने दें। पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई ऐसी स्थिति का सामना कर रहा हो, तो तुरंत हेल्पलाइन 1091 या स्थानीय थाने से संपर्क करें।

यह मामला न केवल न्याय की मांग करता है, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि घरेलू हिंसा किसी भी रूप में अस्वीकार्य है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, अधिक विवरण सामने आएंगे, लेकिन उम्मीद है कि यह घटना अन्य परिवारों के लिए चेतावनी बनेगी।

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