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By: Ravindra Sikrwar

मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में साइबर ठगों ने एक नया और डरावना तरीका अपनाया है। घमापुर इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड प्राचार्य दंपत्ति को ठगों ने खुद को ‘एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) का अधिकारी’ बताकर पूरे चार दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा। इस दौरान बुजुर्ग दंपत्ति न घर से बाहर निकल पाए, न किसी से बात कर पाए और न ही मोबाइल का इस्तेमाल कर पाए – सब कुछ ठग के रिमोट कंट्रोल में था। अगर महिला की सूझबूझ न होती तो लाखों-करोड़ों की ठगी होना तय था।

घटना 6 दिसंबर की दोपहर की है। दंपत्ति के पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली स्थित ATS का वरिष्ठ अधिकारी बताया और गंभीर आवाज में कहा, “आपके नाम और आधार से जुड़े बैंक खातों से 70 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। आपको आतंकवादियों के साथ साठगांठ और कमीशन के 70 लाख रुपए मिलने के सबूत मिले हैं। आपकी सिम से देश की गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान और बांग्लादेश भेजी जा रही हैं।”

बुजुर्ग इतने डर गए कि कुछ पूछने-समझने की हिम्मत ही नहीं हुई। ठग ने तुरंत कहा, “अब आप दोनों पूछताछ के लिए डिजिटल अरेस्ट में हैं। कोई बाहर जाएगा नहीं, किसी से बात करेगा नहीं, वरना तुरंत गिरफ्तारी होगी और पूरा परिवार जेल जाएगा।” इसके बाद ठग ने एक लिंक भेजा और कहा कि “सुरक्षा के लिए” यह ऑफिशियल ऐप डाउनलोड कर लें”। जैसे ही दंपत्ति ने ऐप इंस्टॉल किया, ठग को उनके मोबाइल का पूरा एक्सेस मिल गया – स्क्रीन शेयरिंग, कैमरा, माइक, मैसेज, कॉन्टैक्ट्स सब कुछ।

अगले चार दिन तक ठग दिन-रात वीडियो कॉल पर रहा। दोनों बुजुर्गों को घर के एक कमरे में बैठने को कहा गया। मोबाइल हमेशा ऑन रखना था। खाना-पीना, नहाना-धोना तक ठग की इजाजत से होता था। ठग बार-बार डराता रहा कि “अगर किसी को बताया तो सीधे CBI और RAW की टीम घर पर आएगी।” उसने दंपत्ति से उनके सारे बैंक अकाउंट डिटेल, FD, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी पेपर्स तक की जानकारी ले ली और ट्रांसफर की तैयारी करने लगा।

मंगलवार सुबह ठग ने महिला को बैंक भेजा कि “कुछ औपचारिकताओं के लिए केवाईसी करवानी है”। जैसे ही महिला घर से बाहर निकलीं, उन्होंने पास की एक दुकान से अपने पुराने परिचित वकील को फोन किया और सारी बात बताई। वकील ने तुरंत क्राइम ब्रांच को सूचना दी। एडिशनल SP क्राइम जितेन्द्र सिंह के नेतृत्व में टीम तुरंत घमापुर पहुंची। पुलिस ने दोनों बुजुर्गों को सकुशल बाहर निकाला, उनके फोन से खतरनाक ऐप अनइंस्टॉल करवाया और डिजिटल अरेस्ट की भयानक कैद से आजाद कराया।

पुलिस ने बताया कि ठग अभी भी सक्रिय है और उसकी कॉल उत्तर प्रदेश व बंगाल के नंबरों से ट्रेस हो रही हैं। मामला धारा 419, 420, 467, 468, 471 IPC और IT एक्ट के तहत दर्ज कर लिया गया है। साइबर सेल की टीम आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी अपने आप को CBI, ATS, ED या पुलिस अधिकारी बताकर डराए तो तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत करें। कोई भी अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड न करें। “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया भारत में होती ही नहीं है – यह सिर्फ ठगों का नया हथियार है।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि साइबर अपराधी अब बुजुर्गों को सबसे आसान शिकार मान रहे हैं। लेकिन इस बार एक महिला की हिम्मत और समझदारी ने पूरे खेल को पलट दिया।

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