By: Ravindra Sikarwar
आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक नई तरह की साइबर ठगी के बारे में जनता को आगाह किया है, जिसमें अपराधी यूएसएसडी (अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डेटा) कोड का दुरुपयोग करके लोगों के मोबाइल फोन पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय कर रहे हैं। इससे ठग बैंकिंग ओटीपी, वेरिफिकेशन कॉल्स और अन्य महत्वपूर्ण संदेशों को चुराकर बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने इस तरह की शिकायतों में वृद्धि देखी है, जिसके बाद यह अलर्ट जारी किया गया।
यह ठगी का तरीका बेहद चालाकी भरा है। अपराधी आमतौर पर खुद को कूरियर कंपनी या डिलीवरी एजेंट बताकर फोन करते हैं। वे कहते हैं कि आपका कोई पार्सल डिलीवरी के लिए कन्फर्मेशन या रीशेड्यूलिंग की जरूरत है। बातचीत के दौरान वे एसएमएस के जरिए एक विशेष कोड भेजते हैं और पीड़ित को उसे डायल करने के लिए कहते हैं। यह कोड आमतौर पर *21* से शुरू होता है, उसके बाद ठग का मोबाइल नंबर आता है। जैसे ही व्यक्ति यह कोड डायल करता है, उसके फोन पर अनजाने में कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो जाती है। इससे सभी इनकमिंग कॉल्स ठग के नंबर पर चली जाती हैं, जबकि पीड़ित को इसका पता भी नहीं चलता।
एक बार कॉल फॉरवर्डिंग हो जाने के बाद ठग आसानी से बैंक ट्रांजेक्शन के ओटीपी प्राप्त कर लेते हैं। वे व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अन्य ऐप्स की वेरिफिकेशन कॉल्स को भी इंटरसेप्ट कर अकाउंट हैक कर लेते हैं। इससे न केवल बैंक अकाउंट से पैसे निकाले जाते हैं, बल्कि सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर भी कब्जा कर लिया जाता है। कई मामलों में ठग पीड़ित के संपर्कों से भी धोखाधड़ी करते हैं। यह ठगी इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें इंटरनेट या कोई मैलवेयर की जरूरत नहीं पड़ती। यूएसएसडी कोड बिना नेट कनेक्शन के काम करते हैं, जो टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर से जुड़े होते हैं।
पहले भी कॉल फॉरवर्डिंग से जुड़ी ठगियां होती रही हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनकी संख्या में तेज इजाफा हुआ है। गृह मंत्रालय के अनुसार, अपराधी अब कूरियर सर्विस का बहाना सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। कभी-कभी वे बैंक कस्टमर केयर या टेलीकॉम कंपनी का प्रतिनिधि बनकर भी फोन करते हैं और कहते हैं कि आपका केवाईसी अपडेट नहीं है या सिम ब्लॉक हो जाएगी। ऐसे में लोग घबराकर कोड डायल कर लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका सरल होने के कारण आम लोगों के लिए पहचानना मुश्किल हो जाता है।
इस ठगी से बचने के लिए गृह मंत्रालय ने कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। सबसे पहले, किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर कभी भी यूएसएसडी कोड डायल न करें, खासकर जो *21*, *61* या *67* से शुरू होते हों। अगर आपको लगता है कि आपके फोन पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई है, तो तुरंत ##002# डायल करके सभी फॉरवर्डिंग सुविधाओं को डिएक्टिवेट कर दें। यह कोड सभी तरह की कॉल फॉरवर्डिंग को रद्द कर देता है। साथ ही, समय-समय पर *#21# डायल करके चेक करें कि आपके नंबर पर फॉरवर्डिंग तो नहीं है।
अगर आप इस ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो देर न करें। तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, उतनी ही जल्दी बैंक अकाउंट फ्रीज करके नुकसान रोका जा सकता है। कई मामलों में समय पर शिकायत से पैसे वापस भी मिल जाते हैं।
यह ठगी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि व्यक्तिगत गोपनीयता को भी खतरे में डालती है। महत्वपूर्ण जॉब इंटरव्यू, बिजनेस कॉल्स या निजी बातचीत भी ठग सुन सकते हैं। इसलिए सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है। परिवार के बुजुर्गों और बच्चों को इस बारे में जरूर बताएं, क्योंकि वे अक्सर ऐसे फोन कॉल्स पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं।
साइबर अपराधियों की तकनीक दिन-ब-दिन विकसित हो रही है, लेकिन जागरूकता से हम खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। गृह मंत्रालय की यह चेतावनी हमें याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी बरतना कितना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें, पहले जांच-पड़ताल करें। इस तरह हम न केवल खुद को, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रख सकते हैं। साइबर सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है, और छोटी-छोटी सावधानियां बड़े नुकसान से बचा सकती हैं।
