by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (8 अक्टूबर, 2025) को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने आधिकारिक ईमेल सेवा को अमेरिकी दिग्गज गूगल मेल से हटाकर भारतीय मूल की जोहो मेल पर स्थानांतरित कर लिया। यह निर्णय केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जो अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक शुल्कों के बीच विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता कम करने का संदेश देता है। शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नई ईमेल आईडी साझा करते हुए लोगों से भविष्य के संवाद के लिए इसे अपनाने का आग्रह किया, जिससे यह खबर तेजी से वायरल हो गई।
घोषणा का पूरा विवरण:
एक्स पर अपनी पोस्ट में शाह ने लिखा, “नमस्कार सबको, मैंने जोहो मेल पर स्विच कर लिया है। कृपया मेरी ईमेल आईडी में बदलाव को नोट करें। मेरी नई ईमेल आईडी है amitshah.bjp@zohomail.in। भविष्य के ईमेल संवाद के लिए कृपया इस पते का उपयोग करें। इस मामले पर आपका सौजन्यपूर्ण ध्यान देने के लिए धन्यवाद।” यह घोषणा सरल लेकिन प्रभावशाली थी, जो सरकार के डिजिटल आत्मनिर्भरता अभियान को रेखांकित करती है। शाह का यह कदम न केवल व्यक्तिगत स्तर पर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का उदाहरण है, बल्कि यह अन्य सरकारी अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
जोहो मेल, जो चेन्नई स्थित जोहो कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित एक सुरक्षित और विज्ञापन-मुक्त ईमेल सेवा है, गूगल मेल और माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक का एक मजबूत भारतीय विकल्प के रूप में उभरा है। यह सेवा डेटा गोपनीयता पर विशेष जोर देती है और भारत में ही डेटा संग्रहण की सुविधा प्रदान करती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। शाह के इस बदलाव से जोहो मेल की लोकप्रियता में और वृद्धि होने की उम्मीद है, खासकर सरकारी और कॉर्पोरेट क्षेत्र में।
ट्रंप-शैली का अनोखा समापन और सोशल मीडिया पर हलचल:
शाह की पोस्ट का समापन वाक्यांश “इस मामले पर आपका सौजन्यपूर्ण ध्यान देने के लिए धन्यवाद” ने सोशल मीडिया पर खासी चर्चा पैदा कर दी। यह शैली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट्स से मिलती-जुलती है, जहां वे अक्सर इसी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। कई यूजर्स ने इसे एक व्यंग्यात्मक संदेश के रूप में देखा, जो अमेरिकी व्यापार नीतियों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को दर्शाता है। एक मीम ने लिखा, “ट्रंप को जवाब: हम भी स्वदेशी पर जोर दे रहे हैं!” इससे पोस्ट को लाखों व्यूज और रीट्वीट्स मिले, जो स्वदेशी अभियान को मजेदार तरीके से प्रचारित करने में सहायक साबित हुए।
जोहो कंपनी और उसके योगदान की झलक:
जोहो कॉर्पोरेशन एक बहुराष्ट्रीय तकनीकी फर्म है, जो वेब-आधारित व्यावसायिक अनुप्रयोगों और कार्यालय उत्पादकता उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है। कंपनी के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने शाह के इस कदम का स्वागत करते हुए एक्स पर लिखा, “सर, हम पर भरोसा जताने के लिए धन्यवाद। मैं इस पल को जोहो के उन कड़ी मेहनत करने वाले इंजीनियरों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने 20 वर्षों से अधिक समय तक भारत में रहकर कंपनी को मजबूत बनाया। उनकी आस्था सार्थक हुई। जय हिंद, जय भारत।” वेंबू ने पहले भी जोहो के ‘अरत्ताई’ मैसेजिंग ऐप को व्हाट्सऐप का भारतीय विकल्प बताते हुए प्रचार किया है, जो हाल ही में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की सुविधा के साथ अपडेट हो रहा है।
जोहो की सफलता भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत को दर्शाती है। कंपनी ने विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता कम करने के लिए सरकारी प्रयासों का समर्थन किया है, और इसका उपयोग अब छोटे व्यवसायों से लेकर बड़ी संस्थाओं तक फैल चुका है।
सरकारी स्तर पर स्वदेशी की व्यापक पहल:
शाह का यह निर्णय एक व्यापक सरकारी अभियान का हिस्सा है, जो विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता घटाने पर केंद्रित है। इससे पहले, केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले महीने जोहो के कार्यालय सॉफ्टवेयर सूट पर स्विच करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, “मैं जोहो पर जा रहा हूं – दस्तावेजों, स्प्रेडशीट्स और प्रेजेंटेशन्स के लिए हमारा अपना स्वदेशी प्लेटफॉर्म।” इसी क्रम में, शिक्षा मंत्रालय ने अपने सभी अधिकारियों को आधिकारिक दस्तावेजी कार्यों के लिए जोहो कार्यालय सूट अपनाने का निर्देश दिया है। यह कदम विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता कम करने और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वदेशी’ आह्वान के तहत यह पहल अमेरिकी शुल्कों के जवाब में आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम भारतीय तकनीकी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएंगे और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करेंगे। गूगल मेल से जोहो मेल पर माइग्रेशन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिकाएं भी अब उपलब्ध हो रही हैं, जो पुराने ईमेल्स और संपर्कों को सुरक्षित रखते हुए आसान संक्रमण सुनिश्चित करती हैं।
वैश्विक संदर्भ और संभावित प्रभाव:
यह बदलाव अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच एक रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जहां अमेरिका अपनी कंपनियों को प्राथमिकता देता है, वहीं भारत स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। शाह के कदम से न केवल जोहो जैसी कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि सरकारी स्तर पर डिजिटल गोपनीयता और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
यह घटना भारतीय तकनीकी क्षेत्र में एक नया अध्याय खोल रही है, जहां स्वदेशी समाधान वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को चुनौती दे रहे हैं। जैसे-जैसे अधिक अधिकारी इस दिशा में कदम उठाएंगे, उम्मीद है कि ‘मेक इन इंडिया’ का सपना साकार होगा और देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और मजबूत बनेगी।
