Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

भोपाल/बालाघाट:मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सशस्त्र और कुख्यात नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं। बालाघाट जिले में शनिवार को दस से अधिक हार्डकोर नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में अपने हथियार डाल दिए। ये सभी नक्सली छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और इन पर तीनों राज्यों की सरकारों ने कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने न केवल इन नक्सलियों का स्वागत किया, बल्कि प्रत्येक को भारतीय संविधान की प्रति भेंट कर उन्हें नई जिंदगी की शुभकामना दी। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र और संविधान के रास्ते पर आना चाहते हैं, उनके लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

कौन-कौन से नक्सली हुए सरेंडर?
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम है – सुरेंद्र उर्फ कबीर, जो नक्सलियों के स्पेशल जोनल कमिटी (SZC) का सचिव था। तीन राज्यों ने मिलकर इस पर 77 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। 1995 में नक्सल संगठन से जुड़े कबीर लंबे समय तक शीर्ष नक्सली नेता देवजी के बॉडीगार्ड रहे और बाद में नए कैडर्स को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने का काम करते थे।

बाकी नौ नक्सलियों के नाम हैं – 

  • राकेश ओडी उर्फ मनीष 
  • जरिना उर्फ जोगी मुसाक 
  • नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा 
  • सलीता उर्फ सावित्री 
  • जयशीला उर्फ ललीता अयोम 
  • शिल्पा नुप्पो 
  • समर उर्फ समारू 
  • लालसिंह मरावी उर्फ सींगा 
  • विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी 

ये सभी नक्सली एक से दो दशक से अधिक समय से सक्रिय थे और इनमें से कई पर हत्या, लूट, पुलिस मुठभेड़ और विस्फोट जैसे गंभीर मामले दर्ज थे।

हथियारों का जखीरा भी किया सपुर्द
नक्सलियों ने न केवल खुद को समर्पित किया, बल्कि भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस के हवाले किए। इनमें शामिल हैं – 

  • दो AK-47 राइफलें 
  • दो इंसास राइफलें 
  • एक SLR 
  • दो .303 राइफलें 
  • सात BGL शेल 
  • चार वॉकी-टॉकी सेट 

इतना भारी हथियारों का जखीरा एक साथ सरेंडर होना अपने आप में सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता को दर्शाता है।

कैसे हुआ इतना बड़ा सरेंडर?
सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और घेराबंदी से तंग आकर ये नक्सली 6 दिसंबर को सरेंडर करने का मन बना चुके थे। सबसे पहले उन्होंने बालाघाट के मुक्की रेंज में तैनात वनरक्षक गुलाब सिंह उइके से संपर्क किया। वनरक्षक ने हॉक फोर्स के गुप्तचर विभाग के जवान से बात की। इसके बाद दोनों की मदद से सभी नक्सली रात करीब 11 बजे बालाघाट रेंज के आईजी संजय सिंह के बंगले पर पहुंचे और हथियारों सहित औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया।

पूरे ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था ताकि नक्सली संगठन को भनक न लगे और वे बीच रास्ते में कोई वारदात न कर सकें। रातों-रात हुई इस कार्रवाई ने मध्य प्रदेश पुलिस और हॉक फोर्स की कार्यकुशलता का परिचय दिया।

मुख्यधारा में वापसी का नया अध्याय
सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों को राज्य सरकार की नक्सल सरेंडर नीति के तहत तत्काल राहत राशि, आवास, रोजगार और सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसके साथ ही उनके परिवारों को भी पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि जो लोग हिंसा छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सम्मानजनक जीवन मिलेगा और जो हिंसा पर उतारू रहेंगे, उनके खिलाफ अभियान और तेज होगा।

बालाघाट, बैलाडिला और दक्षिण बस्तर क्षेत्र में सक्रिय इन नक्सलियों का एक साथ मुख्यधारा में लौटना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। आने वाले दिनों में और नक्सलियों के सरेंडर होने की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp