By: Ravindra Sikarwar
अदीस अबाबा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 को इथियोपिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने एक विशेष समारोह में प्रदान किया। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को भारत-इथियोपिया संबंधों को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान और वैश्विक स्तर पर दूरदर्शी नेतृत्व के लिए दिया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीएम मोदी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख हैं। यह सम्मान मोदी को मिलने वाला 28वां अंतरराष्ट्रीय राज्य सम्मान है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
यह समारोह अदीस अबाबा के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया, जहां दोनों नेताओं के बीच गहन चर्चा भी हुई। प्रधानमंत्री मोदी की यह इथियोपिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जिस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ऊंचा उठाने का फैसला किया। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह सम्मान ग्लोबल साउथ की सकारात्मक एजेंडा को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पुरस्कार स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे विनम्रता से ग्रहण किया और कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक से सम्मानित होना उनके लिए बहुत गर्व की बात है। उन्होंने इस पुरस्कार को 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मोदी ने लिखा, “मैं ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित होने पर गौरवान्वित हूं। मैं इसे भारत के 140 करोड़ लोगों को समर्पित करता हूं।” अपने संबोधन में उन्होंने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को धन्यवाद दिया और याद किया कि पिछले महीने दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अबी ने उन्हें इथियोपिया आने का निमंत्रण दिया था। मोदी ने कहा, “मेरे मित्र और भाई के इस आमंत्रण को मैं कैसे ठुकरा सकता था? इसलिए पहली ही संभावना पर मैं यहां आया।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को उन अनगिनत भारतीयों और इथियोपियाई लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने सदियों से दोनों देशों के बीच संबंधों को पोषित किया है। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पिछले एक सदी से अधिक समय से भारतीय शिक्षक इथियोपिया के विकास में योगदान दे रहे हैं। आज भी कई भारतीय फैकल्टी सदस्य इथियोपिया के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में सेवा दे रहे हैं। मोदी ने राष्ट्र निर्माण में ज्ञान की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग वैश्विक चुनौतियों का समाधान ढूंढने और नए अवसर पैदा करने में मदद करेगा।
इथियोपिया और भारत के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सैन्य सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का लंबा इतिहास रहा है। इथियोपिया अफ्रीका की उन प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो कभी उपनिवेश नहीं बनी। दोनों लोकतांत्रिक देश मानवता की शांति और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें इथियोपिया के लिए जी20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत कर्ज पुनर्गठन, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) छात्रवृत्तियों की संख्या दोगुनी करना, आईटीईसी कार्यक्रम के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोर्स शुरू करना और महात्मा गांधी अस्पताल में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने में भारत की मदद शामिल है।
यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रमाण है। भाजपा ने इसे भारत की उभरती शक्ति और मोदी के सम्मानित नेतृत्व का प्रतिबिंब बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत-इथियोपिया मैत्री में एक मील का पत्थर बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुरस्कार अफ्रीका के साथ भारत के मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है, खासकर ग्लोबल साउथ में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के लिए नए युग की शुरुआत है। रणनीतिक साझेदारी से खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। इथियोपिया की अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन कर रही है और भारत उसके विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है। कुल मिलाकर, यह सम्मान भारत की विदेश नीति की सफलता का प्रतीक है, जो वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
