Hindu migrants: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है। इसी क्रम में विश्व भर में रह रहे हिंदू प्रवासियों के समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के शीर्ष सलाहकारों को पत्र लिखकर स्थिति पर तत्काल और सख्त कदम उठाने की अपील की है।
Hindu migrants: प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जताई गहरी चिंता
प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित पत्र में हिंदू प्रवासी संगठनों ने कहा कि वे अत्यंत दुख और गंभीर चिंता के साथ यह अपील कर रहे हैं। पत्र में हाल की हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमले लगातार बढ़ रहे हैं और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
प्रवासियों ने विशेष रूप से युवा बांग्लादेशी हिंदू दीपू चंद्र दास की लिंचिंग और जिंदा जलाने जैसी घटनाओं का हवाला दिया।
Hindu migrants: अगस्त 2025 से बढ़ती हिंसा का दावा
पत्र में कहा गया है कि अगस्त 2025 के बाद से हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा में तेज़ी आई है। दिसंबर 2025 के मध्य से डर और असुरक्षा का माहौल और गहराया है, जो अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा।
प्रवासी समूहों का आरोप है कि हालात बिगड़ने के बावजूद सरकारी स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया।
लियाकत–नेहरू पैक्ट का संदर्भ
पत्र में 1950 के लियाकत–नेहरू पैक्ट का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इस समझौते में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रभावी साबित नहीं हो सका।
प्रवासियों का कहना है कि इतिहास में कई बार बांग्लादेशी हिंदुओं को असुरक्षित हालात में छोड़ दिया गया है।
हिंसा के आंकड़े और घटनाएं
पत्र के अनुसार, अगस्त 2024 से जून 2025 के बीच अल्पसंख्यकों पर 2,442 से अधिक हमले दर्ज किए गए, जिनमें अधिकांश पीड़ित हिंदू थे।
इसी अवधि में दर्जनों हिंदुओं की हत्या की बात कही गई है। अगस्त से नवंबर 2024 के बीच 82 लोगों की मौत का दावा किया गया। इसके अलावा मंदिरों में तोड़फोड़, यौन हिंसा और भीड़ द्वारा आगजनी जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया गया है।
बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई यूनिटी काउंसिल के अनुसार हाल के हफ्तों में स्थिति और खराब हुई है। पिछले 35 दिनों में अलग-अलग हिंसक घटनाओं में 11 हिंदुओं की मौत की बात कही गई है।
इस्कॉन संत का मामला भी उठाया गया
पत्र में इस्कॉन के वरिष्ठ संत चिन्मयकृष्ण दास का भी उल्लेख है, जिन्हें कथित तौर पर मनगढ़ंत आरोपों के तहत 25 नवंबर 2024 से जेल में रखा गया है।
प्रवासी समूहों ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार इस हिंसा को सांप्रदायिक मानने से इनकार कर रही है, जिससे अपराधियों को बेखौफ होने का संकेत मिलता है।
भारत सरकार से प्रमुख मांगें
विश्व हिंदू प्रवासियों ने भारत सरकार से कई ठोस कदम उठाने की अपील की है, जिनमें—
- बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की सार्वजनिक और स्पष्ट निंदा
- मानवीय कॉरिडोर और शरणार्थी शिविरों की व्यवस्था
- संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में सुरक्षित क्षेत्र (सेफ ज़ोन) का गठन
- इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र में उठाना
- कट्टरपंथी समूहों पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाना
पत्र में यह भी कहा गया कि सुरक्षित कॉरिडोर के बिना कई बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए भारत आना संभव नहीं है।
अमेरिका में विरोध प्रदर्शन की घोषणा
हिंदू प्रवासी संगठनों ने यह भी ऐलान किया है कि 31 जनवरी को अमेरिका के प्रमुख शहरों में मौन विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
इन प्रदर्शनों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की ओर आकर्षित करना और यह संदेश देना है कि ऐसे मामलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

