Hindi Gaurav:
- हिंदी भाषा की साधना को मिलेगा सम्मान
- इंदौर में आयोजित होगा सम्मान समारोह
- साहित्य और पत्रकारिता जगत में उत्साह
हिंदी भाषा के प्रचार, प्रसार और सृजनात्मक विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दो विशिष्ट व्यक्तित्वों को वर्ष 2026 के हिंदी गौरव अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा यह प्रतिष्ठित सम्मान इंदौर के वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय और ग्वालियर के अनुभवी पत्रकार अतुल तारे को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान समारोह इसी माह इंदौर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया जाएगा।
Hindi Gaurav: हिंदी साधकों को सम्मानित करने की परंपरा का सातवां वर्ष
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने जानकारी देते हुए बताया कि हिंदी गौरव अलंकरण का यह सातवां वर्ष है। संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष हिंदी भाषा के क्षेत्र में सतत और प्रभावशाली योगदान देने वाले दो व्यक्तियों का चयन किया जाता है। चयन समिति ने वर्ष 2026 के लिए सर्वसम्मति से इन दोनों विभूतियों का चयन किया है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में हिंदी को समृद्ध करने का उल्लेखनीय कार्य किया है।
Hindi Gaurav: नर्मदा प्रसाद उपाध्याय: साहित्य सृजन की सशक्त पहचान

इंदौर निवासी नर्मदा प्रसाद उपाध्याय हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार हैं। उन्होंने अब तक 18 निबंध संग्रहों की रचना की है, साथ ही कला और संस्कृति पर केंद्रित 30 पुस्तकों का लेखन किया है। इसके अतिरिक्त वे लगभग 20 पुस्तकों के संपादन का दायित्व भी निभा चुके हैं। उनके साहित्यिक अवदान को देश-विदेश में सराहना मिली है और हिंदी साहित्य में उनका योगदान विशेष महत्व रखता है।
अतुल तारे: चार दशकों की निष्पक्ष पत्रकारिता

वरिष्ठ पत्रकार अतुल तारे वर्तमान में स्वदेश समाचार पत्र समूह के संपादक हैं। वे पिछले लगभग 40 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्यिक लेखन को भी समृद्ध किया है और एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है। उनकी लेखनी सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को मुखर रूप से प्रस्तुत करती रही है।
हिंदी जगत में उत्साह
संस्थान द्वारा दोनों सम्मानित व्यक्तियों के हिंदी भाषा के प्रति दीर्घकालिक समर्पण को रेखांकित करते हुए यह अलंकरण प्रदान किया जाएगा। समारोह को लेकर साहित्य, पत्रकारिता और बौद्धिक जगत में उत्साह का वातावरण है। यह सम्मान हिंदी भाषा की गरिमा और उसकी निरंतर साधना को सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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