By: Ravindra Sikarwar
उज्जैन, जो भगवान महाकाल की पवित्र नगरी के रूप में जाना जाता है, नए साल के आगमन पर लाखों श्रद्धालुओं की आमद से गुलजार हो रहा है। 25 दिसंबर से महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटी हुई है। देश के विभिन्न कोनों से लोग अपने वाहनों से यहां पहुंच रहे हैं, जिससे शहर की सड़कों पर वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इस स्थिति में यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी।
महाकाल मंदिर में रोजाना औसतन 1.5 से 2 लाख श्रद्धालु दर्शन करते हैं। सामान्य दिनों में शहर में लगभग 5 से 6 हजार चार पहिया वाहन प्रवेश करते हैं, लेकिन छुट्टियों और त्योहारों के दौरान यह आंकड़ा 10 से 12 हजार तक पहुंच जाता है। भक्त मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। पहले ये श्रद्धालु नेविगेशन ऐप्स की मदद से शहर की संकरी गलियों और व्यस्त मार्गों से होकर मंदिर पहुंचने की कोशिश करते थे, जिससे कई क्षेत्रों में गंभीर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती थी।
इस समस्या का नवाचारपूर्ण समाधान निकालते हुए उज्जैन पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया। पुलिस ने आईटी विशेषज्ञों और साइबर सेल की टीम के साथ मिलकर नेविगेशन सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव किए। अब जब किसी सड़क पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ती है या जाम लगता है, तो उस मार्ग को तत्काल वैकल्पिक रूट्स से बदल दिया जाता है। इस व्यवस्था से बाहर से आने वाले भक्तों को केवल वे रास्ते ही सुझाए जाते हैं जो पुलिस द्वारा अनुमोदित और सुरक्षित होते हैं।
संकरी और भीड़भाड़ वाली सड़कों को नेविगेशन से अस्थायी रूप से हटा दिया जाता है, जबकि बाहरी रिंग रोड और निर्धारित पार्किंग क्षेत्रों तक पहुंचने वाले मार्गों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे श्रद्धालुओं को सीधे पार्किंग स्थलों तक पहुंचने में आसानी होती है और मंदिर परिसर के आसपास अनावश्यक भीड़ नहीं जमा होती।
ट्रैफिक की रियल-टाइम निगरानी के लिए पुलिस की एक विशेष टीम तैनात की गई है, जो सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक निरंतर काम करती है। टीम में लगभग 10 सदस्य शामिल हैं, जो सीसीटीवी फुटेज और अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तुरंत निर्णय लेते हैं। जैसे ही किसी क्षेत्र में वाहनों की संख्या बढ़ती है, वैकल्पिक रास्ते सक्रिय कर दिए जाते हैं। इस कार्य में एक निजी आईटी कंपनी की मदद ली जा रही है, जो एल्गोरिदम के माध्यम से केवल सुगम और खाली मार्गों को ही प्रदर्शित करती है।
इस नई व्यवस्था से न केवल ट्रैफिक जाम कम हुआ है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित और तेजी से मंदिर तक पहुंचने में मदद मिल रही है। पुलिस का मानना है कि यह तकनीकी हस्तक्षेप शहर की यातायात व्यवस्था को और अधिक कुशल बनाएगा, खासकर सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान।
मंदिर प्रशासन ने भी भीड़ को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं। नए साल की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। अब भक्त केवल ऑफलाइन तरीके से ही बुकिंग करा सकते हैं। विशेष रूप से 1 जनवरी की भस्म आरती के लिए किसी भी प्रकार की बुकिंग नहीं होगी। इसके अलावा, 5 जनवरी तक सामान्य VIP दर्शन सुविधा भी निलंबित रहेगी, केवल VVIP श्रद्धालुओं को ही विशेष अनुमति मिलेगी।
पिछले कुछ दिनों में ही लगभग 5.5 लाख भक्तों ने महाकाल के दर्शन किए हैं, और नए साल पर यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस और मंदिर समिति की संयुक्त तैयारी से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल रहा है। उज्जैन की यह हाई-टेक पहल अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है, जहां भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण बड़ी चुनौती रहती है।
