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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में यह स्वीकार किया है कि राज्य में देश की सबसे अधिक शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में प्रति 1,000 नवजात शिशुओं में से 40 की मौत हो जाती है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। यह दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।

यह जानकारी एक विधायक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई, जिसमें राज्य में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए उठाए गए कदमों और खर्च के बारे में पूछा गया था। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए उठाए गए कदमों और खर्च की विस्तृत जानकारी दी।

शिशु मृत्यु दर के कारण और सरकार के प्रयास:
सरकार ने बताया कि शिशु मृत्यु दर के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें कुपोषण, कम वजन के साथ जन्म, संक्रमण, समय से पहले जन्म और उचित स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी शामिल है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं:

  • स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: राज्य भर के अस्पतालों में नवजात शिशुओं के लिए विशेष केयर यूनिट (SNCU – Special Newborn Care Unit) स्थापित किए जा रहे हैं। इन इकाइयों में गंभीर रूप से बीमार या कम वजन वाले शिशुओं को विशेष देखभाल दी जाती है।
  • जागरूकता अभियान: माताओं और परिवारों को गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद शिशु की देखभाल के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। इसमें पोषण, टीकाकरण और स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया जा रहा है।
  • पोषण कार्यक्रम: गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए विशेष पोषण योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि कुपोषण को रोका जा सके। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक पोषण आहार प्रदान किया जा रहा है।
  • स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण: शिशु स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के लिए डॉक्टरों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

लागत और भविष्य की योजनाएँ:
सरकार ने यह भी बताया कि इस संकट से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। इन फंड्स का उपयोग स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और जागरूकता अभियानों में किया गया है।

भविष्य की योजनाओं में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को और बेहतर बनाना, दूरदराज के क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना और बाल चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाना शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पाँच वर्षों में शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत से नीचे लाया जाए।

यह स्वीकारोक्ति और उसके बाद सरकार द्वारा दी गई जानकारी इस बात का संकेत है कि राज्य इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों को और गति देने की आवश्यकता है ताकि हर नवजात शिशु को जीवन का अधिकार मिल सके।

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