Heritage: दशकों बाद ऐतिहासिक धरोहर की वापसी
भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अहम और सकारात्मक खबर सामने आई है। अमेरिका के एक प्रतिष्ठित संग्रहालय ने यह स्वीकार किया है कि उसके संग्रह में शामिल तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियाँ भारत के मंदिरों से अवैध रूप से निकाली गई थीं। अब इन्हें भारत को वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Heritage: मंदिरों से चोरी कर विदेश पहुंचीं मूर्तियाँ
जांच में सामने आया कि ये तीनों कांस्य मूर्तियाँ कई दशक पहले भारत के दक्षिणी हिस्सों में स्थित प्राचीन मंदिरों से चोरी की गई थीं। बाद में इन्हें अवैध कला बाजार के जरिए विदेश भेज दिया गया और अंततः ये अमेरिकी संग्रहालय के संग्रह का हिस्सा बन गईं। उस समय इन मूर्तियों की खरीद के दौरान उनके वास्तविक स्रोत और कानूनी दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की गई थी।
जांच के बाद लिया गया फैसला
भारत और अमेरिका की एजेंसियों के बीच सहयोग से इन मूर्तियों की उत्पत्ति की गहन जांच की गई। ऐतिहासिक अभिलेखों, मंदिरों के रिकॉर्ड और विशेषज्ञों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि ये मूर्तियाँ भारत की हैं और इन्हें गैरकानूनी तरीके से बाहर ले जाया गया था। इसके बाद संग्रहालय प्रशासन ने स्वेच्छा से इन्हें लौटाने का निर्णय लिया।
सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की दिशा में कदम
संग्रहालय ने अपने बयान में कहा कि वह सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और नैतिक संग्रह नीति के प्रति प्रतिबद्ध है। इसी कारण यह निर्णय लिया गया है कि जिन वस्तुओं की उत्पत्ति अवैध पाई जाती है, उन्हें उनके मूल देश को वापस सौंपा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य संग्रहालयों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।
भारत के लिए क्यों है यह वापसी अहम
इन कांस्य मूर्तियों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा है। ये न केवल कला की दृष्टि से अनमोल हैं, बल्कि सदियों से मंदिर परंपरा और आस्था से भी जुड़ी रही हैं। इनकी वापसी से भारत की खोई हुई सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी।
भविष्य में बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय सहयोग
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पारदर्शिता और मजबूत होगी। इससे अवैध कला तस्करी पर रोक लगेगी और देशों को अपनी सांस्कृतिक विरासत वापस पाने में सहायता मिलेगी।
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