Report by: Rupesh Soni
Hazaribagh : झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया-संयोजिका अध्यक्ष संघ के बैनर तले अपनी जायज मांगों को लेकर जिले की हजारों रसोइयों और संयोजिकाओं ने मंगलवार को सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारी महिलाओं ने उपायुक्त (DC) और जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय तक जुलूस निकाला और अपनी लंबित मांगों के समर्थन में एक मांग पत्र सौंपा।

दो दशकों की सेवा के बाद भी सम्मानजनक मानदेय से वंचित
Hazaribagh संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वर्ष 2004 से राज्य के सरकारी और अल्पसंख्यक विद्यालयों में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग की गरीब महिलाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं। अपने जीवन के 21 स्वर्णिम वर्ष शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाने में समर्पित करने के बावजूद, आज भी उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है।
- अन्यायपूर्ण मानदेय: रसोइयों को वर्तमान में मात्र 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी के मानकों का सरासर उल्लंघन है।
- बिना मानदेय काम: गंभीर आरोप यह भी है कि संयोजिका और अध्यक्ष के पदों पर कार्यरत महिलाओं से बिना किसी मानदेय के काम लिया जा रहा है, जिसे संघ ने ‘आधुनिक गुलामी’ करार दिया है।
सुरक्षा और सामाजिक लाभ की मांग: 10 लाख का बीमा और पेंशन
Hazaribagh प्रदर्शनकारियों ने केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सरकार के समक्ष कड़े प्रस्ताव रखे हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- न्यूनतम वेतन लागू करना: सभी कर्मियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम सम्मानजनक वेतन मिले।
- सामाजिक सुरक्षा: कार्यरत महिलाओं को पीएफ (PF), ग्रेच्युटी और पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
- दुर्घटना बीमा: काम के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने की स्थिति में आश्रितों को 10 लाख रुपये के बीमा की राशि सुनिश्चित की जाए।
- पुनर्नियोजन: जिन रसोइयों को राजनीतिक या अन्य कारणों से हटाया गया है, उन्हें तत्काल वापस काम पर लिया जाए।
इटकी की मीना देवी का मामला: प्रशासनिक अनदेखी का जीवंत उदाहरण
Hazaribagh संघ ने इटकी प्रखंड के मकुन्दा मध्य विद्यालय की विधवा रसोइया मीना देवी के प्रति हो रहे अन्याय को विशेष रूप से रेखांकित किया। वर्ष 2018 में उन्हें पद से हटा दिया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि उपायुक्त रांची और जिला शिक्षा अधीक्षक के मौखिक आदेश तथा बीईईओ इटकी के दो बार लिखित आदेश के बावजूद उन्हें अब तक काम पर नहीं रखा गया है और न ही उनका बकाया मानदेय दिया गया है।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मीना देवी का पुनर्नियोजन और अन्य रसोइयों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्यव्यापी हड़ताल को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।
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