By: Ravindra Sikarwar
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हाल ही में पहुंची सनातन धर्म की प्रचारिका हर्षा रिछारिया ने अपने निजी जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका भावी पति फिल्म इंडस्ट्री या मॉडलिंग की दुनिया से जुड़ा व्यक्ति नहीं होगा। बल्कि, वह ऐसा इंसान होगा जो सनातन धर्म की गहराई से मान्यता रखता हो और उसके मूल्यों पर चलता हो। हर्षा की यह यात्रा ‘शक्ति सृजन यात्रा’ का हिस्सा है, जो युवाओं में धार्मिक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

हर्षा रिछारिया ने कौशांबी में लोगों से संवाद करते हुए बताया कि शादी के मामले में उनके परिवार की तरफ से कोई दबाव नहीं है। उन्हें घर से हमेशा पूरा समर्थन और स्नेह मिलता रहा है, जिसकी वजह से वह अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय खुद लेने में सक्षम हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिवार का सहयोग ही उनकी स्वतंत्रता का आधार है, और इसी वजह से वह अपने विचारों के अनुसार जीवनसाथी चुनना चाहती हैं।
सनातन धर्म को अपना जीवन मिशन बताते हुए हर्षा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 में योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल से हिंदू संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। यह आयोजन सनातन धर्म की महत्ता को दुनिया के सामने लाने में सफल रहा। अब उनका हर कार्य इसी धर्म की सेवा और प्रसार के लिए समर्पित है। इस समर्पण से उन्हें गहन मानसिक शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है। पहले की जिंदगी में भले ही सफलता और नाम मिला हो, लेकिन वर्तमान जीवन उन्हें ज्यादा सुकून प्रदान करता है क्योंकि अब सब कुछ धर्म के लिए है।

‘शक्ति सृजन यात्रा’ की शुरुआत प्रयागराज से हुई थी, जो युवा पीढ़ी को जागृत करने का माध्यम है। इस यात्रा में हर्षा युवाओं को लव जिहाद जैसे खतरों से सावधान रहने और अंतर-धार्मिक विवाह के जोखिमों के बारे में समझाती हैं। कौशांबी में यह यात्रा पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका उत्साहपूर्ण स्वागत किया। हर्षा का मानना है कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए हर्षा ने बताया कि ‘शक्ति सृजन’ अभियान को वह पूरे देश में फैलाना चाहती हैं। विभिन्न राज्यों में जाकर सनातन संस्कृति को मजबूत बनाने का प्रयास करेंगी। खुद को इस बड़े मिशन का एक छोटा हिस्सा मानते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्य उन्हें उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
हर्षा रिछारिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के भोपाल की निवासी हैं। उन्होंने एमबीए की डिग्री हासिल की है और पहले एंकरिंग तथा मॉडलिंग के क्षेत्र में सक्रिय रहीं। सोशल मीडिया पर वह धार्मिक और आध्यात्मिक सामग्री साझा करती हैं, जिससे लाखों लोग जुड़े हुए हैं। महाकुंभ 2025 में उनकी उपस्थिति काफी चर्चित रही, जहां वह रथ पर सवार होकर पहुंचीं और माथे पर तिलक लगाए सुंदर साध्वी के रूप में पहचान बनी। दो वर्ष पहले निरंजनी अखाड़े के स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज से दीक्षा लेकर उन्होंने आध्यात्मिक पथ अपनाया। वर्तमान में वह उत्तराखंड में रहती हैं और सनातन धर्म के प्रचार में पूरी तरह समर्पित हैं।
हर्षा की यह यात्रा और बयान युवाओं के लिए प्रेरणादायी हैं, जो दिखाते हैं कि ग्लैमर की चकाचौंध छोड़कर भी जीवन में गहरा अर्थ खोजा जा सकता है। उनकी सोच सनातन मूल्यों पर आधारित मजबूत परिवार और समाज की नींव रखने की दिशा में इशारा करती है।
