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by-Ravindra Sikarwar

दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत, बुराई पर अच्छाई की विजय और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक है; जानिए इसके ऐतिहासिक महत्व, रीति-रिवाजों और वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से

दीपावली, जिसे दीपोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, भारत का सबसे महत्वपूर्ण और उत्सवपूर्ण पर्व है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जब अंधकार को दूर करने के लिए असंख्य दीपक जलाए जाते हैं। 2025 में यह पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। दीपावली केवल रोशनी का त्योहार ही नहीं है, बल्कि यह धन-धान्य, सुख-समृद्धि और नई आशाओं का संदेश देता है। इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं – “सुख, शांति और सफलता की कामना!” – और अपने घरों को साफ-सुथरा कर, मिठाइयां बांटकर और पटाखों के साथ खुशियां मनाते हैं। इस लेख में हम दीपावली के गहन महत्व, पौराणिक कथाओं, परंपराओं, स्वास्थ्य संबंधी सलाह और आधुनिक संदर्भों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

दीपावली का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व:
दीपावली का मूल संदेश रामायण से जुड़ा है। भगवान राम, सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, जिसकी खुशी में प्रजा ने दीपक जलाकर उनका स्वागत किया। यह घटना कार्तिक अमावस्या को ही हुई मानी जाती है। इसी प्रकार, महाभारत में पांडवों का 12 वर्ष वनवास और 1 वर्ष अज्ञातवास पूरा होने पर उनका राज्याभिषेक भी दीपावली से जुड़ा है। जैन धर्म में भगवान महावीर का निर्वाण दिवस, सिख धर्म में गुरु हरगोबिंद जी की अमृतसर वापसी और स्वामिनारायण संप्रदाय में भगवान स्वामिनारायण का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाता है।

वैदिक काल से ही दीपावली का उल्लेख मिलता है, जहां इसे ‘कौमुदी महोत्सव’ कहा गया। पुराणों में इसे लक्ष्मी पूजा का दिन माना गया है, क्योंकि इस दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ। अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह पर्व नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

पांच दिनों का दीपावली उत्सव: विस्तृत विवरण
दीपावली वास्तव में पांच दिनों का महोत्सव है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है।

  1. धनतेरस (धन्वंतरि जयंती): दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और चिकित्सा के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। लोग सोना-चांदी, बर्तन या वाहन खरीदते हैं, क्योंकि ऐसा करने से धन की वृद्धि होती है। 2025 में यह 18 अक्टूबर को था। घरों में सायंकाल दीपक जलाकर बुरी नजर से बचाव किया जाता है।
  2. नरक चतुर्दशी (कलिपूजा): अमावस्या से एक दिन पहले। दक्षिण भारत में नरकासुर राक्षस के वध की खुशी में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण ने नरकासुर का संहार किया था। इस दिन सुबह ‘उत्थान व्रत’ रखा जाता है और तेल से स्नान किया जाता है। असम में मां काली की पूजा विशेष रूप से होती है।
  3. दीपावली मुख्य दिवस (लक्ष्मी पूजा): अमावस्या का दिन। सायंकाल मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। घर को लीप-पोतकर साफ किया जाता है, रंगोली बनाई जाती है और मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं। पूजा के बाद पटाखे फोड़े जाते हैं। उत्तर भारत में राम-रावण युद्ध की याद में यह दिन विशेष है।
  4. अन्नकूट/गोवर्धन पूजा: दीपावली के अगले दिन। भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ा। मंदिरों में 56 या 108 व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। गाय-बैल की पूजा की जाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाता है। गुजरात में न्यू ईयर के रूप में मनाया जाता है।
  5. भाई दूज: यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं और लंबी आयु की कामना करती हैं। यह यम-यमी की कथा से प्रेरित है।

रीति-रिवाज और वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

  • दीपक जलाना: पांच दीपक मुख्य द्वार पर जलाए जाते हैं – राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और पांचवां बाधा निवारण के लिए। वैज्ञानिक रूप से, दीपकों की रोशनी बैक्टीरिया को नष्ट करती है और विटामिन डी का उत्पादन बढ़ाती है।
  • रंगोली: चावल के आटे से बनाई जाती है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करती है।
  • मिठाई और भोजन: गुड़-लड्डू, खीर, हलवा आदि। नमक रहित भोजन व्रत का हिस्सा है।
  • पटाखे: खुशी का प्रतीक, लेकिन पर्यावरण प्रदूषण के कारण अब ग्रीन पटाखों का चलन बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार केवल लाइसेंसी पटाखे ही फोड़े जाते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, दीपावली के समय वायु प्रदूषण बढ़ता है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ मास्क पहनने और घरेलू उपायों की सलाह देते हैं।

आधुनिक संदर्भ और सामाजिक महत्व
आज दीपावली वैश्विक स्तर पर मनाई जाती है। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में ‘फेस्टिवल ऑफ लाइट्स’ के रूप में सरकारी छुट्टी है। बॉलीवुड में ‘दिवाली ब्लॉकबस्टर’ फिल्में रिलीज होती हैं। ई-कॉमर्स कंपनियां भारी छूट देती हैं।

सामाजिक रूप से, यह पर्व गरीबों को भोजन वितरण, दान-पुण्य और परिवारिक मिलन का अवसर प्रदान करता है। कोविड के बाद ऑनलाइन पूजा और वर्चुअल दीवाली का चलन बढ़ा। पर्यावरण के प्रति जागरूकता से ‘कार्बन न्यूट्रल दीपावली’ अभियान चल रहे हैं, जहां बिजली के लैंप और इको-फ्रेंडली पटाखे इस्तेमाल होते हैं।

स्वास्थ्य सलाह:

  • व्रत: फलाहार लें, अधिक तला-भुना न खाएं।
  • प्रदूषण से बचाव: घर पर हवा शुद्ध करने के लिए तुलसी-अदरक का काढ़ा पिएं।
  • त्वचा सुरक्षा: पटाखों से दूर रहें, सनस्क्रीन लगाएं।
  • मानसिक स्वास्थ्य: परिवार के साथ समय बिताएं, ध्यान करें।

दीपावली हमें सिखाती है कि अंधेरे में भी प्रकाश है। यह पर्व नई ऊर्जा, आशा और एकता का संचार करता है। सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं! आपका जीवन हमेशा प्रकाशमय रहे, समृद्धि प्राप्त हो और सफलता आपके कदम चूमे। जय श्री राम! जय मां लक्ष्मी!

(धार्मिक ग्रंथों, ऐतिहासिक स्रोतों और समाचार एजेंसियों से संकलित)

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