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By: Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: शहर के भीषण ट्रैफिक जाम से स्थायी निजात दिलाने के लिए बन रही बहुप्रतीक्षित स्वर्णरेखा एलिवेटेड रोड परियोजना अब तेज़ी पकड़ने लगी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सबसे पहले निशाना बना है हाट बाज़ार क्षेत्र, जहां कॉर्मल कान्वेंट स्कूल के पीछे और चर्च के ठीक सामने स्वर्णरेखा नदी किनारे वर्षों से चल रही अस्थायी और स्थायी दुकानें। इन दुकानों को पूरी तरह हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। साथ ही एलिवेटेड रोड के पिलर खड़े करने और कच्चा बेड तैयार करने के लिए स्वर्णरेखा नदी की पुरानी पत्थर की दीवार को तोड़ने का काम भी युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।

हाट बाज़ार का यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में से एक है। यहां दर्जनों दुकानदार बक्से, पानी की टंकी, कूलर, प्लास्टिक की बाल्टी-ड्रम और घरेलू सामान बेचते हैं। इनमें से अधिकांश दुकानें नदी किनारे अतिक्रमण करके बनाई गई थीं। कई दुकानदार तो नदी की दीवार पर ही लोहे के एंगल लगाकर छत बना रखी थी। अब इन सभी को हटाने के लिए नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दुकानदारों को पहले ही कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं और अब अंतिम चेतावनी के बाद बुलडोज़र चलाने की तैयारी है।

प्रशासन का कहना है कि एलिवेटेड रोड के लिए स्वर्णरेखा नदी के ऊपर 6 लेन का फ्लाईओवर बनेगा जो महल रोड, माल रोड, चेतकपुरी, सिन्धी कॉलोनी, लोहिया नगर होते हुए फूलबाग चौराहे तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 4.5 किलोमीटर होगी और इससे शहर के सबसे पुराने और जामग्रस्त इलाकों को राहत मिलेगी। लेकिन इस रोड के पिलर खड़े करने के लिए नदी के बीच में मजबूत कच्चा बेड तैयार करना जरूरी है। इसके लिए नदी की दोनों तरफ की पुरानी दीवारों को तोड़कर चौड़ा करना पड़ेगा। पिछले सप्ताह से यह काम शुरू हो चुका है और बड़ी-बड़ी मशीनों से पत्थर तोड़े जा रहे हैं।

हाट बाज़ार के दुकानदार इस फैसले से काफी परेशान हैं। कई दुकानदारों ने बताया कि वे पिछले 20-25 सालों से यहीं दुकान चला रहे हैं और उनका पूरा परिवार इसी पर निर्भर है। एक दुकानदार ने बताया, “हमें पहले कहा गया था कि सिर्फ अतिक्रमण हटेगा, लेकिन अब सारी दुकानें ही जा रही हैं। नया ठिकाना भी नहीं दिया जा रहा।” वहीं कुछ दुकानदारों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें वैकल्पिक स्थान या मुआवजा दिया जाए।

नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दुकानदारों को पहले ही कई बार सूचित किया जा चुका है। उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज और सबूत हैं कि यह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण है। फिर भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें एक सप्ताह का समय और दिया गया है कि वे स्वयं अपनी दुकानें खाली कर लें। उसके बाद प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मुआवजा सिर्फ उन्हें मिलेगा जो कानूनी रूप से पात्र होंगे, न कि अतिक्रमण करने वालों को।

एलिवेटेड रोड परियोजना की कुल लागत लगभग 380 करोड़ रुपये बताई जा रही है और इसका काम पिछले साल शुरू हुआ था। अब तक कई जगह पिलर खड़े हो चुके हैं और कुछ हिस्सों में स्लैब भी डाला जा चुका है। अधिकारियों का दावा है कि 2026 के अंत तक यह पूरी तरह चालू हो जाएगी। शहरवासियों को भी इस परियोजना से बड़ी उम्मीद है क्योंकि फूलबाग, माल रोड, हाट बाज़ार और रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले मार्ग पर रोज़ाना घंटों जाम लगता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकानें हटने से थोड़ी परेशानी तो होगी, लेकिन लंबे समय में शहर को बहुत फायदा होगा। एक व्यापारी ने कहा, “अगर इससे जाम खत्म होता है तो हम सब तैयार हैं। बस प्रशासन को चाहिए कि दुकानदारों को उचित पुनर्वास दे।”

फिलहाल स्वर्णरेखा नदी के किनारे मशीनों की गर्जना और पत्थर टूटने की आवाज़ गूंज रही है। आने वाले कुछ दिनों में हाट बाज़ार का पुराना स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और ग्वालियर शहर एक नए और सुंदर एलिवेटेड रोड की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

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