By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर शहर के एक साधारण से मोहल्ले में उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब महज पांच साल की एक मासूम बच्ची ने पुलिस और पड़ोसियों को वह दर्दनाक मंजर बयां किया जो उसने अपनी नन्ही आंखों से देखा था। बच्ची की मासूम जुबान से निकले शब्द सुनकर हर कोई सिहर उठा – “पापा बहुत गुस्से में थे… उन्होंने मम्मी के बाल पकड़े, उन्हें कमरे में घसीटा, गर्दन पर पैर रखा और कैंची से नाक काट दी। मैं डर के मारे वहीं खड़ी रोती रही… पापा बार-बार मम्मी के सिर पर लात मार रहे थे।”
यह दिल दहला देने वाली घटना उस वक्त हुई जब मां घर के आंगन में पानी भर रही थीं। बच्ची के अनुसार, अचानक उसके पिता घर आए और बिना कुछ कहे-सुने पत्नी के बाल पकड़कर उसे जबरदस्ती कमरे के अंदर ले गए। वहां जो कुछ हुआ, वह किसी भी इंसान के लिए कल्पना से परे है। बच्ची ने बताया कि पिता ने मां को जमीन पर पटक दिया, उनकी गर्दन पर पैर रखकर उन्हें हिलने तक नहीं दिया और फिर पास पड़ी कैंची उठाकर नाक पर वार कर दिया। नाक का एक हिस्सा पूरी तरह कट गया और खून का फव्वारा छूट पड़ा।
बच्ची बार-बार यही दोहरा रही थी कि उसकी मां चीखती-चिल्लाती रहीं, मदद के लिए गुहार लगाती रहीं, लेकिन पिता का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। वह बार-बार मां के सिर को पकड़कर लातों से प्रहार करते रहे। नन्ही बच्ची डर के मारे चुपके से कोने में खड़ी सब कुछ देखती रही, लेकिन इतनी छोटी उम्र में वह कुछ कर भी नहीं सकती थी। उसकी आंखों के सामने उसकी मां खून से लथपथ तड़प रही थीं और पिता क्रोध में अंधे हो चुके थे।
घटना की सूचना मिलते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे। किसी तरह उन्होंने घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी नाक पर प्लास्टिक सर्जरी की और जान बचाई। महिला की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से पुलिस को बताया कि पति पिछले काफी समय से शराब के नशे में उन्हें मारपीट करता था, लेकिन इस बार गुस्सा हद से बाहर हो गया। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करना और मारपीट करना उसका पुराना स्वभाव बन चुका था, पर किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन वह इस कदर हैवान बन जाएगा।
पुलिस ने बच्ची का बयान दर्ज किया और आरोपी पति को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है, हालांकि उसका कहना है कि “गुस्सा इतना आया कि कुछ समझ नहीं आया।” पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, घरेलू हिंसा और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बच्ची को फिलहाल उसकी नानी के पास भेज दिया गया है, क्योंकि वह अभी तक सदमे में है और बार-बार वही खौफनाक दृश्य याद करके रोने लगती है।
यह घटना एक बार फिर घरेलू हिंसा की उस काली सच्चाई को सामने ला रही है जो आए दिन अखबारों की सुर्खियां बनती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में चुप्पी ओढ़कर दबा दी जाती है। एक पांच साल की बच्ची की आंखों के सामने मां को इस तरह तड़पता देखना क्या उस बच्ची के नाजुक मन पर जीवनभर का घाव नहीं छोड़ेगा? सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ कानून बन जाने से घर के अंदर हो रही यह जुल्म बंद हो जाएंगे या हमें समाज के स्तर पर भी सोच बदलने की जरूरत है?
ग्वालियर पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द कोर्ट में पेश किया जाएगा और पीड़िता को हर संभव सुरक्षा व कानूनी मदद मुहैया कराई जाएगी। लेकिन उस मासूम बच्ची का क्या, जिसने अपनी नन्ही उम्र में वह देख लिया जो बड़े-बड़े भी नहीं देख पाते? यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था की नाकामी की गवाही दे रही है।
