By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर: मुरार थाना क्षेत्र स्थित जिला अस्पताल परिसर के प्रसूति गृह में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक मरीज के परिजन (अटेंडर) ने वार्ड के अंदर मोबाइल से वीडियो बनाने शुरू कर दिए। नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो बात हाथापाई तक जा पहुंची। परिजन और स्टाफ के बीच धक्का-मुक्की के बाद मारपीट हो गई। पूरी घटना किसी दूसरे व्यक्ति ने अपने फोन में कैद कर ली और कुछ ही घंटों में वह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। प्रसूति वार्ड में भर्ती एक महिला की डिलीवरी होने के बाद उसके परिजन वार्ड में घुस आए थे। परिजनों में शामिल एक युवक ने अचानक अपना मोबाइल निकाला और वार्ड के अंदर बेड, मरीजों की स्थिति और स्टाफ की ड्यूटी का वीडियो बनाने लगा। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारियों ने तुरंत एतराज जताया और कहा कि बिना अनुमति के मरीजों व वार्ड का वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है तथा यह मरीजों की निजता का उल्लंघन है।
इस पर युवक ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और वीडियो बनाना बंद नहीं किया। बात बढ़ी तो स्टाफ की एक महिला कर्मचारी ने उसका हाथ पकड़कर मोबाइल छीनने की कोशिश की। इसी दौरान युवक ने धक्का दे दिया। देखते-ही-देखते दोनों पक्षों में गाली-गलौज और मारपीट शुरू हो गई। वार्ड में मौजूद अन्य परिजन भी बीच-बचाव करने के बजाय स्टाफ के खिलाफ हो गए। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक व्यक्ति नर्स को धमकी दे रहा है तो दूसरी तरफ स्टाफ की महिलाएं भी जवाब में चिल्ला रही हैं। मारपीट में किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वार्ड में मौजूद प्रसूति महिलाएं और नवजात शिशु डर के मारे रोने लगे।
हंगामा बढ़ता देख अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और अन्य कर्मचारी दौड़े आए और किसी तरह मामला शांत कराया। परिजन गुस्से में अस्पताल से चले गए, लेकिन मारपीट का पूरा वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप्स और फेसबुक पर तेजी से फैल गया। दोपहर तक वीडियो हजारों लोगों ने देख लिया और लोग अस्पताल प्रशासन व स्टाफ दोनों पर सवाल उठाने लगे।
आश्चर्य की बात यह है कि घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद न तो परिजनों की ओर से और न ही अस्पताल स्टाफ की ओर से मुरार थाने में कोई लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। मुरार थाना प्रभारी का कहना है कि उन्हें केवल सोशल मीडिया के जरिए घटना की जानकारी मिली है। यदि कोई पक्ष शिकायत लेकर आएगा तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.के. गुप्ता ने बताया कि मरीजों और विशेषकर प्रसूति वार्ड में फोटो-वीडियो लेना पूरी तरह वर्जित है क्योंकि इससे गंभीर मरीजों की प्राइवेसी भंग होती है। कई बार परिजन वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं जिससे अस्पताल की छवि खराब होती है। उन्होंने कहा कि स्टाफ ने सिर्फ नियम का पालन कराते हुए रोका था, लेकिन परिजन ने अभद्रता की और हाथापाई शुरू कर दी। फिर भी मामले को बढ़ावा नहीं देने के लिए अस्पताल प्रशासन ने अभी शिकायत नहीं की है।
दूसरी ओर परिजनों का कहना है कि वार्ड में सुविधाओं की कमी है, गंदगी फैली रहती है और स्टाफ मरीजों से अच्छा व्यवहार नहीं करता, इसलिए उन्होंने वीडियो बनाया था ताकि हकीकत सामने आए। उनका आरोप है कि सच दिखाने पर स्टाफ ने मारपीट की।
यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में परिजनों और स्टाफ के बीच झड़प हुई हो। पहले भी जयारोग्य अस्पताल और मुरार प्रसूति गृह में इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में सख्त सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कवरेज और परिजनों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस होने से ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं।
फिलहाल वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी हरकत में आ गए हैं और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर परिजन या स्टाफ में से कोई शिकायत करता है तो पुलिस भी एफआईआर दर्ज कर सकती है। अभी तो सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है कि गलत कौन था – सच दिखाने वाला अटेंडर या नियम लागू करने वाला स्टाफ?
