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by-Ravindra Sikarwar

अहमदाबाद: गुजरात की एंटी-टेररिज्म यूनिट (एटीएस) ने एक खतरनाक आतंकी प्लान को चकमा देकर तीन फरार अपराधियों को हिरासत में लिया है, जो भारत के कई राज्यों में भयानक धमाकों की मंशा रखते थे। यह सफल अभियान शनिवार की देर शाम अडलज टोल नाका के आसपास चला, जहां बदमाश अवैध असलहों का लेन-देन कर रहे थे। पकड़े गए तीनों से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा पिस्टल, 30 सक्रिय गोलियां और 4 लीटर कैस्टर तेल जब्त हुआ, जो रिसिन जैसा जानलेवा रसायन तैयार करने के लिए इस्तेमाल होता है। इससे साफ है कि अपराधी साधारण बंदूकों के अलावा रासायनिक हमलों से भारी तबाही मचाने की फिराक में थे।

पकड़े गए अपराधियों के नाम डॉ. अहमद मोहिउद्दीन सैयद (हैदराबाद का निवासी, चीन से मेडिकल की पढ़ाई), मोहम्मद सुहेल (यूपी के मोहम्मद सुलैमान का बेटा) और आजाद सुलैमान सैफी (यूपी के सुलैमान सैफी का बेटा) हैं। एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने खुलासा किया कि ये तीनों पिछले पूरे साल से विभाग की कड़ी नजर में थे। डॉ. सैयद को सरगना बताया जा रहा है, जो उग्रवादी सोच से ग्रस्त होकर विदेशी साजिशकर्ताओं से जुड़ा था। तहकीकात में सामने आया कि सैयद टेलीग्राम ऐप पर ‘अबू खादेजा’ नाम के व्यक्ति से बातचीत करता था, जो अफगानिस्तान के आईएसकेजीपी (इस्लामिक स्टेट खोरासान) गुट से ताल्लुक रखता है।

विभाग के बयान के मुताबिक, डॉ. सैयद ने चरमपंथी मान्यताओं को अपनाने के बाद पैसे जुटाने और साथियों को भड़काने का काम शुरू कर दिया था। वह कैस्टर बीन्स से रिसिन नामक घातक विष तैयार करने की शुरुआती कोशिशें कर रहा था, जो थोड़ी सी मात्रा में भी सैकड़ों जिंदगियां लील सकता है। असलहों का माल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से लाया गया था, जिसे यूपी से आए सुहेल और आजाद ने गुजरात के कलोल इलाके में डिलीवर किया। फोन के डिजिटल निशानों से इनकी जगह का पता लगाया गया और बनासकांठा क्षेत्र में धरपकड़ हुई। अपराधी तीन स्मार्टफोन और दो लैपटॉप समेत गिरफ्त में आए, जिनकी डेटा जांच से एक साल पुरानी जासूसी वाली हरकतें उजागर हुईं।

एटीएस ने कहा कि अभी तक कोई घरेलू गुप्त नेटवर्क नहीं पकड़ा गया, लेकिन पूछताछ में देशी-विदेशी गिरोहों से रिश्तों की जांच तेज है। यह पकड़ इस वर्ष गुजरात एटीएस की दूसरी बड़ी जीत है। जनवरी में एटीएस ने एक्यूआईएस (अल-कायदा का भारतीय उपमहाद्वीपी इकाई) से जुड़े पांच चरमपंथियों को सलाखों के पीछे डाला था, जिसमें बैंगलोर की एक महिला थी जो पाकिस्तानी लिंक्स से ऑनलाइन जिहादी कैंपेन चला रही थी। जुलाई में भी चार एक्यूआईएस सदस्यों की गिरफ्तारी हुई थी। इन सफलताओं से जाहिर होता है कि एटीएस की सतर्कता और गुप्त सूत्र आतंकी मंसूबों को चूर-चूर करने में कारगर साबित हो रही है।

एक आरोपी को 17 नवंबर तक पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है, बाकी दो को तुरंत कोर्ट में उतारा जाएगा। एटीएस ने अलर्ट जारी किया है कि संदिग्ध साथियों की खोजबीन चल रही है, और राष्ट्र की हिफाजत के लिए ऐसी मुहिमें बिना रुके जारी रहेंगी। यह वाकया आतंक के उभरते संकट को रेखांकित करता है, जहां पढ़े-लिखे नौजवान भी कट्टरता के जाल में फंस रहे हैं।

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