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by-Ravindra Sikarwar

22 सितंबर से लागू होने वाली नई GST संरचना को 5% और 18% के सीमित स्लैब के साथ मंजूरी मिल गई है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “समर्थन और विकास की दोहरी खुराक” कहा है, जबकि विपक्ष ने इसे “एक अच्छा पहला कदम, लेकिन पर्याप्त कदम नहीं” बताया है।

GST क्या है?
GST (वस्तु और सेवा कर) भारत में एक व्यापक, बहु-चरणीय, गंतव्य-आधारित कर है। इसने विभिन्न अप्रत्यक्ष करों जैसे वैट, सेवा कर, उत्पाद शुल्क, आदि को बदल दिया है। इसका उद्देश्य “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा को लागू करके भारत को एक एकीकृत सामान्य बाजार बनाना है।

मौजूदा GST संरचना में क्या समस्याएँ थीं?

पहले, GST में 0%, 5%, 12%, 18% और 28% के कई कर स्लैब थे। इससे कर प्रणाली जटिल और समझने में कठिन हो गई थी।

  • जटिलता: कई स्लैब के कारण कर गणना, वर्गीकरण और अनुपालन मुश्किल था।
  • हितधारक भ्रम: व्यवसायों और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम था कि कौन सी वस्तु या सेवा किस श्रेणी में आती है।
  • प्रशासनिक चुनौतियाँ: सरकार के लिए इतनी श्रेणियों का प्रबंधन करना एक जटिल और बोझिल कार्य था।

नई GST संरचना में क्या बदलाव हैं?

GST परिषद ने अब स्लैबों को केवल दो मुख्य श्रेणियों में सीमित करने का निर्णय लिया है: 5% और 18%

  • आवश्यक वस्तुएँ (5%): खाद्य पदार्थ, कुछ कपड़े, और अन्य आवश्यक वस्तुओं को इस श्रेणी में रखा गया है।
  • अन्य वस्तुएँ और सेवाएँ (18%): बाकी सभी वस्तुओं और सेवाओं, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, रेस्टोरेंट सेवाएँ, आदि को 18% स्लैब में शामिल किया गया है।

इस बदलाव के क्या फायदे हैं?

  • सरलता: कम स्लैबों से कर प्रणाली सरल और पारदर्शी बनेगी, जिससे व्यापार करना आसान होगा।
  • अनुपालन में आसानी: व्यवसायों के लिए GST नियमों का पालन करना अब अधिक सरल होगा।
  • उपभोक्ताओं को लाभ: वस्तुओं की कीमतें स्थिर हो सकती हैं क्योंकि कर दरें अब निश्चित होंगी।

राजनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रियाएँ:
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह छोटे व्यवसायों, मध्यम वर्ग और गरीबों को बड़ी राहत देगा। उन्होंने इसे “समर्थन और विकास की दोहरी खुराक” बताया, यह दर्शाता है कि यह कदम न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा बल्कि सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित करेगा।

दूसरी ओर, विपक्षी नेता पी. चिदंबरम ने इस कदम को “एक अच्छा पहला कदम, लेकिन पर्याप्त कदम नहीं” कहा है। उनका मानना ​​है कि अभी भी सुधार की गुंजाइश है और सरकार को और कदम उठाने चाहिए, जैसे कि पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाना।

आगे की राह:
GST सुधारों को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इन बदलावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार को राज्यों के साथ मिलकर काम करना होगा। यह देखना बाकी है कि यह नया ढाँचा भारतीय अर्थव्यवस्था को किस तरह से प्रभावित करेगा।

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