by-Ravindra Sikarwar
भारत सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य मौजूदा कर स्लैब को कम करके केवल दो करना है: 5% और 18%। इस कदम का लक्ष्य कर प्रणाली को सरल और अधिक कुशल बनाना है।
प्रमुख प्रस्ताव और उद्देश्य:
- दो स्लैब की नई प्रणाली: वर्तमान में, जीएसटी में कई कर स्लैब हैं, जैसे 5%, 12%, 18% और 28%। नए प्रस्ताव के तहत, इन स्लैबों को हटाकर केवल दो मुख्य दरें लागू की जाएंगी:
- 5% स्लैब: इस स्लैब में आवश्यक वस्तुएं शामिल होंगी।
- 18% स्लैब: इस स्लैब में अन्य सभी सामान्य वस्तुएं और सेवाएं शामिल होंगी।
यह सरलीकरण आम नागरिकों और व्यवसायों दोनों के लिए कर प्रणाली को समझना और उसका पालन करना आसान बना देगा।
2. “सिन गुड्स” पर 40% कर: तंबाकू और अन्य “सिन गुड्स” (हानिकारक वस्तुएं) पर 40% की एक विशेष उच्च दर लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य इन उत्पादों के उपभोग को हतोत्साहित करना और उनसे प्राप्त राजस्व का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं के लिए करना है।
3. आवश्यक वस्तुओं को किफायती बनाना: प्रस्तावित सुधार का एक प्रमुख उद्देश्य कृषि उत्पादों, स्वास्थ्य सेवा से संबंधित सामानों और हस्तशिल्प जैसी आवश्यक वस्तुओं को आम लोगों के लिए अधिक किफायती बनाना है। इन वस्तुओं पर कम कर दर (5%) लागू होने से उनकी कीमतें घटेंगी, जिससे जनता को सीधा लाभ होगा।
संभावित प्रभाव:
इस सुधार से अर्थव्यवस्था पर कई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकते हैं:
- मूल्य स्थिरता: आवश्यक वस्तुओं पर कम कर दर से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
- व्यवसाय सुगमता: व्यवसायों के लिए कर अनुपालन (टैक्स कंप्लायंस) सरल हो जाएगा, जिससे व्यापार करना आसान होगा।
- राजस्व वृद्धि: उच्च कर दरें “सिन गुड्स” पर लागू होने से सरकार के राजस्व में वृद्धि हो सकती है।
यह प्रस्तावित बदलाव अभी चर्चा में है और इसे अंतिम रूप देने से पहले जीएसटी परिषद और अन्य हितधारकों के बीच व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह सुधार न केवल कर प्रणाली को सरल बनाएगा बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि में भी सहायक होगा।
