By: Ishu Kumar
Gomti : उत्तर प्रदेश में गोमती नदी को स्वच्छ और सतत बनाने के लिए एक नई पहल की तैयारी की जा रही है। राजधानी में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य के प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। यह कार्यक्रम स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (एसटीसी), उत्तर प्रदेश की ओर से होटल ताज में आयोजित किया जा रहा है, जिसका विषय है “जीवनरेखा का पुनर्जीवन: स्वच्छ गोमती।” इसका उद्देश्य केवल नदी की सफाई करना नहीं है, बल्कि इसके दीर्घकालिक संरक्षण और सतत उपयोग के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है।
महत्वपूर्ण हस्तियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी
Gomti कार्यक्रम में प्रदेश के जलशक्ति एवं नमामि गंगे मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और नीति निर्माता भाग लेंगे। एसटीसी के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षत वर्मा के अनुसार, इस आयोजन में तकनीकी और विचार-विमर्श सत्र शामिल हैं, जिनमें नदी की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण के स्रोत और सुधार के उपायों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों की भागीदारी से कार्यक्रम की दिशा और प्रभावशीलता बढ़ेगी।
विशेषज्ञ सुझावों के आधार पर रोडमैप तैयार
Gomti कार्यक्रम के दौरान जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के क्षेत्र के विशेषज्ञ गोमती नदी की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करेंगे और सुधार के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे। इन सुझावों का उपयोग करते हुए नदी के जल स्तर, गुणवत्ता और पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। यह रोडमैप नदी की सफाई के साथ-साथ उसके सतत प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी मार्गदर्शन करेगा।
स्वच्छ और सतत गोमती पर केंद्रित रणनीति
Gomti स्वच्छ गोमती पहल का उद्देश्य केवल तत्काल सफाई अभियान तक सीमित नहीं है। यह कार्यक्रम दीर्घकालिक संरक्षण और पुनर्जीवन पर केंद्रित है, ताकि गोमती प्रदेश की जीवनरेखा के रूप में अपनी भूमिका कायम रख सके। नई रणनीति में नदी के तटवर्ती क्षेत्रों की सफाई, जल गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की सलाह से तैयार की जाने वाली कार्ययोजना न केवल पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करेगी, बल्कि भविष्य में नदी पर होने वाले दबावों को भी कम करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल गोमती नदी को स्वच्छ, अविरल और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति और विशेषज्ञों के सुझाव इसे और प्रभावशाली बनाएंगे, जिससे नदी का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा और यह प्रदेशवासियों के लिए जीवनरेखा के रूप में बनी रहेगी।
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