by-Ravindra Sikarwar
7 नवंबर 2025 को ब्राजील के उत्तरी शहर बेलेम में संयुक्त राष्ट्र का 30वां जलवायु सम्मेलन (COP30) औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है। अमेज़न वर्षावन के किनारे स्थित इस शहर को मेजबान चुना जाना प्रतीकात्मक है, क्योंकि यह जलवायु संकट से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। सम्मेलन का उद्घाटन 6 नवंबर को विश्व नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक से हुआ, जो 21 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने, नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण और जलवायु वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। लेकिन शुरुआत से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जलवायु-विरोधी नीतियों पर नेताओं के बयान हावी हो गए हैं, जो वैश्विक सहयोग की कमी को उजागर कर रहे हैं।
सम्मेलन का पृष्ठभूमि और महत्व:
COP30 पेरिस समझौते (2015) के 10 वर्ष पूरे होने का अवसर है, जब विश्व ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती और विकासशील देशों को वित्तीय सहायता के वादे किए थे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 दुनिया का दूसरा या तीसरा सबसे गर्म वर्ष साबित हो रहा है, जिसमें चरम मौसम घटनाएं – जैसे मेक्सिको, जमैका और हैती में हाल की तूफान – बढ़ रही हैं। सम्मेलन का फोकस निम्नलिखित पर है:
- राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs): सभी देशों को नए, अधिक महत्वाकांक्षी उत्सर्जन कटौती योजनाएं प्रस्तुत करनी हैं। वर्तमान योजनाओं के अनुसार, तापमान वृद्धि 2.3-2.5 डिग्री तक पहुंच सकती है, जो 1.5 डिग्री के लक्ष्य से बहुत अधिक है।
- जलवायु वित्त: COP29 (बाकू) में निर्धारित $300 बिलियन वार्षिक सहायता को 2035 तक $1.3 ट्रिलियन तक बढ़ाने की “बाकू से बेलेम रोडमैप” पर प्रगति। विकासशील देशों को हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए धनराशि की आवश्यकता है।
- अनुकूलन और हानि-क्षति: बाढ़, सूखा और समुद्र स्तर वृद्धि से प्रभावित देशों के लिए अनुकूलन कोष और क्षतिपूर्ति तंत्र।
- वन संरक्षण: अमेज़न पर विशेष ध्यान, जहां ब्राजील ने नॉर्वे से $3 बिलियन और स्वयं $1 बिलियन का वादा किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उद्घाटन सत्र में कहा, “यह दशक त्वरित कार्रवाई का है। हम 1.5 डिग्री का रास्ता अभी भी खुला रख सकते हैं, लेकिन इसके लिए अभूतपूर्व उत्सर्जन कटौती जरूरी है।” लगभग 100 देशों के नेता, वैज्ञानिक, एनजीओ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
ट्रंप की अनुपस्थिति और नेताओं के आलोचनात्मक बयान:
अमेरिका – विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक – ने ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में पेरिस समझौते से पुनः退出 कर लिया है। कोई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी सम्मेलन में नहीं है, जिससे वैश्विक एकजुटता पर सवाल उठे हैं। नेताओं ने ट्रंप को सीधे निशाने पर लिया, जो जलवायु परिवर्तन को “सबसे बड़ा धोखा” (con job) बता चुके हैं।
- ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा: उद्घाटन भाषण में उन्होंने “चरमपंथी ताकतों” पर प्रहार किया, जो जलवायु संकट को राजनीतिक लाभ के लिए झूठ बताती हैं। लूला ने चीनी निवेशों से इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने का उल्लेख किया।
- चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक: ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए कहा, “उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में झूठ बोला कि जलवायु संकट दुनिया का सबसे बड़ा धोखा है।” बोरिक ने अमेरिका की अनुपस्थिति को “मानवता के खिलाफ” करार दिया।
- कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो: उन्होंने ट्रंप की नीतियों को “मानवता-विरोधी” बताया और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता समाप्त करने की मांग की।
- यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर: चेतावनी दी कि “जलवायु पर सहमति टूट चुकी है,” लेकिन यूरोपीय संघ ने कार्बन कटौती योजना पेश की।
- यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन: अमेरिकी रुख की आलोचना करते हुए, यूरोप की नई हरित योजना की घोषणा की।
ये बयान न केवल ट्रंप की व्यक्तिगत टिप्पणियों पर, बल्कि उनकी नीतियों – जैसे कोयला, तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना – पर केंद्रित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की अनुपस्थिति समझौतों को कमजोर कर सकती है, क्योंकि UNFCCC में सर्वसम्मति जरूरी है। हालांकि, यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी नेता इसे “नए गठबंधन” की शुरुआत बता रहे हैं।
अन्य प्रमुख चुनौतियां और विवाद:
सम्मेलन की शुरुआत ही विवादों से घिरी हुई है:
- आवास संकट: बेलेम में 1.3 मिलियन आबादी वाले शहर में प्रतिनिधियों के लिए होटल कम पड़ गए, जिससे “लव मोटेल” (घंटे के हिसाब से कमरे) तक बुक हो गए। आयोजन समिति ने रियो डी जेनेरो और साओ पाउलो में पूर्व कार्यक्रम आयोजित किए।
- बुनियादी ढांचा विवाद: अमेज़न में सड़क निर्माण के लिए जंगल काटने का आरोप, हालांकि ब्राजील सरकार इसे पुरानी योजना बता रही है। साथ ही, लूला सरकार ने अमेज़न में तेल ड्रिलिंग की अनुमति दी, जो पर्यावरण समूहों द्वारा आलोचना का विषय है।
- प्रमुख अनुपस्थितियां: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नहीं आए। चीन का प्रतिनिधिमंडल उप-प्रधानमंत्री डिंग शुएक्सियान के नेतृत्व में है, जबकि भारत की अनुपस्थिति विकासशील देशों की चिंता बढ़ा रही है।
- सुरक्षा और विरोध: स्वदेशी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए, जिसमें ट्रंप, वॉन डेर लेयेन और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली के पुतले जलाए गए। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जलवायु रक्षकों की सुरक्षा और न्यायपूर्ण संक्रमण की मांग की।
ब्राजील ने “ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर फैसिलिटी” (TFFF) लॉन्च करने की योजना बनाई है, जो वनों के संरक्षण के लिए धन जुटाएगा।
एक कठिन परीक्षा:
COP30 वैश्विक जलवायु सहयोग के लिए एक कठिन परीक्षा है। ट्रंप की नीतियां भले ही बाधा बनी हों, लेकिन लूला जैसे नेता इसे “कार्रवाई का दशक” बनाने का अवसर बता रहे हैं। यदि देश जीवाश्म ईंधन चरणबद्ध समाप्ति, वित्तीय प्रतिबद्धताओं और वन संरक्षण पर सहमत हुए, तो यह पेरिस लक्ष्यों को पुनर्जीवित कर सकता है। अन्यथा, 2025 का यह सबसे गर्म वर्ष चेतावनी बनकर रह जाएगा। सम्मेलन के परिणामों पर नजरें टिकी हैं, जो न केवल पर्यावरण, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित करेंगे।
