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Report by: Himanshu

Giridih : जहाँ एक ओर पूरा देश अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति के सम्मान के कसीदे पढ़ रहा था, वहीं झारखंड के गिरिडीह समाहरणालय परिसर में स्थिति इसके ठीक उलट नजर आई। अपनी जायज मांगों को लेकर धरना दे रही जलसहियाओं और जिला उपायुक्त (DC) रामनिवास यादव के बीच हुए तीखे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। उपायुक्त द्वारा प्रदर्शनकारी महिलाओं को ‘गिरफ्तार कर जेल भेजने’ की धमकी देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली और महिला सम्मान के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पखवाड़ा कार्यशाला में फूटा सात महीने का आक्रोश

Giridih दरअसल, समाहरणालय परिसर में ‘जल महोत्सव पखवाड़ा’ के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से सैकड़ों जलसहियाओं को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान ही जलसहियाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पिछले सात महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।

नाराज महिलाओं का कहना है कि गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के हस्तक्षेप के बाद विभाग को बजट मिल चुका है, लेकिन अधिकारी जानबूझकर भुगतान रोके हुए हैं। इसी बात से क्षुब्ध होकर सैकड़ों जलसहिया समाहरणालय भवन के मुख्य द्वार की सीढ़ियों पर बैठ गईं और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

उपायुक्त का ‘गर्जन’ और वायरल वीडियो का सच

Giridih विवाद तब गहरा गया जब उपायुक्त रामनिवास यादव कार्यालय जाने के लिए मुख्य द्वार पर पहुँचे। सीढ़ियों पर बैठी महिलाओं को देखकर वह बिफर पड़े। वायरल वीडियो में उपायुक्त महिलाओं पर चिल्लाते हुए उन्हें तत्काल धरना समाप्त करने का अल्टीमेटम देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि प्रदर्शन बंद नहीं हुआ तो सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उपायुक्त के इस कड़े तेवर से पूरे परिसर में सन्नाटा पसर गया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इसे अपना घोर अपमान बताते हुए कहा कि जिस दिन उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए था, उस दिन उन्हें जेल भेजने की धमकी दी गई। महिलाओं का आरोप है कि अपनी पीड़ा सुनाने पर उन्हें प्रशासनिक संवेदनशीलता के बजाय ‘गर्जन’ का सामना करना पड़ा।

विभाग की सफाई और प्रशासनिक पक्ष

Giridih इस पूरे मामले पर पीएचडी (PHED) विभाग के पदाधिकारी अभिक अंबाला ने विभाग का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि जिले में कुल 2400 जलसहिया कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि केवल 200 जलसहियाओं का मानदेय रोका गया है, जिसका कारण उनके कार्यों में लापरवाही बरतना है।

पदाधिकारी के अनुसार, इन जलसहियाओं से पूर्व में स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसका जवाब अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि, जलसहियाओं का तर्क है कि लापरवाही के नाम पर सामूहिक रूप से मानदेय रोकना अनुचित है। महिला दिवस के दिन हुए इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने अब राजनैतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है, जहाँ एक ओर प्रशासन अनुशासन की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे महिला गरिमा के खिलाफ बताया जा रहा है।

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