Spread the love

by-Ravindra Sikarwar

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक दस दिवसीय जीवंत हिंदू त्योहार है। इसे ज्ञान, समृद्धि और नई शुरुआत के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह त्योहार घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियों की स्थापना, दैनिक प्रार्थना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गणेश विसर्जन के दौरान मूर्तियों के भव्य जुलूस और जल निकायों में विसर्जन के साथ समाप्त होता है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में, यह त्योहार पूरे भारत में बड़ी भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह समुदाय, एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं और समारोहों की ओर एक बढ़ता रुझान भी शामिल है।

  • उत्सव के प्रमुख पहलू:

मूर्ति स्थापना:
भक्त भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियों को अपने घरों या पंडालों नामक सार्वजनिक अस्थायी आश्रयों में लाते हैं। पंडालों को खूबसूरती से सजाया जाता है और यहां भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

दैनिक अनुष्ठान:
दस दिनों तक, गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए दैनिक प्रार्थनाएं, आरती (भक्ति गीत), फूल, मोदक जैसी मिठाइयां और अन्य चीजें अर्पित की जाती हैं। मोदक को भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग माना जाता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम:
शाम में अक्सर संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रदर्शनों का आयोजन किया जाता है, जो उत्सव में चार चांद लगा देते हैं। इन कार्यक्रमों में बच्चे और वयस्क दोनों ही उत्साह से भाग लेते हैं।

गणेश विसर्जन:
त्योहार का समापन गणेश प्रतिमा को जल निकाय, जैसे नदी या समुद्र में विसर्जित करने के साथ होता है। यह अनुष्ठान निर्माण और विघटन के चक्रीय स्वभाव और देवता की उनके स्वर्गीय निवास की यात्रा का प्रतीक है।

  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ:

प्राचीन उत्पत्ति:
भगवान गणेश की पूजा प्राचीन काल से चली आ रही है और 17वीं शताब्दी में मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में एक सार्वजनिक त्योहार के रूप में इसका प्रचलन बढ़ा।

देश को एकजुट करना:
1893 में, स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इस त्योहार को एक भव्य सार्वजनिक उत्सव में बदल दिया। उन्होंने इसका उपयोग लोगों को एकजुट करने और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान की भावना को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में किया।

  • रुझान और बढ़ती प्रथाएं:

पर्यावरण-अनुकूल विकल्प:
पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल और बायोडिग्रेडेबल मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। कई लोग मूर्ति के बजाय पेड़ लगाकर या घर पर ही छोटे-छोटे गणेश जी बनाकर यह त्योहार मनाते हैं।

सामुदायिक जुड़ाव:
यह त्योहार एक बड़ा सामुदायिक कार्यक्रम है, जो विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के बीच एकजुटता, कृतज्ञता और एकता की भावना को बढ़ावा देता है। मोहल्ले और कॉलोनियों में सभी लोग मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं।

प्रसिद्ध हस्तियों की भागीदारी:
यह त्योहार महत्वपूर्ण मीडिया कवरेज बटोरता है, जिसमें मशहूर हस्तियों की समारोहों में भागीदारी और प्रार्थना करने की कई कहानियां सामने आती हैं। यह त्योहार की लोकप्रियता को और भी बढ़ाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× Whatsapp