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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार आज मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी यानी गणाधिप संकष्टी चतुर्थी है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि दाता और प्रथम पूज्य माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, लेकिन मार्गशीर्ष मास की यह तिथि विशेष फलदायी मानी जाती है क्योंकि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ रहा होता है। आज देशभर के मंदिरों में गणपति की विशेष पूजा-अर्चना, व्रत और कीर्तन का आयोजन हो रहा है। श्रद्धालु सूर्यास्त के बाद चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी का अर्थ और महत्व:
संकष्टी शब्द संस्कृत के ‘संकट’ और ‘हरण’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है ‘संकटों का नाश’। इस दिन गणेश जी की उपासना से जीवन के सभी प्रकार के अवरोध – आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक, स्वास्थ्य संबंधी – दूर होते हैं। पुराणों में वर्णित है कि भगवान गणेश ने इसी तिथि पर कई असुरों का संहार किया था, इसलिए इन्हें गणाधिप (गणों का स्वामी) कहा जाता है।

मार्गशीर्ष मास को मोक्षदा मास भी कहते हैं, क्योंकि इसी मास में गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी आती है। इस मास की संकष्टी चतुर्थी पर गणेश पूजन से सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

आज की तिथि और शुभ मुहूर्त (8 नवंबर 2025):

विवरणसमय
चतुर्थी तिथि प्रारंभ7 नवंबर, रात 11:42 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त8 नवंबर, रात 10:15 बजे
चंद्रोदय समयशाम 7:28 बजे (दिल्ली)
पूजा का शुभ मुहूर्तसूर्यास्त के बाद चंद्रोदय तक
व्रत पारण समय9 नवंबर, सुबह 5:45 से 7:15 बजे

नोट: स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

पूजा विधि: सरल और फलदायी तरीका

  1. स्नान और संकल्प: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संकल्प लें – “मैं मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी के संकष्टी व्रत को भगवान गणेश की कृपा से पूर्ण करूंगा।”
  2. गणेश स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। गणेश मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दूर्वा, सिंदूर, मोदक, लड्डू, फल चढ़ाएं।
  3. मंत्र जाप:

   – मूल मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः (108 बार)

   – संकट नाशक स्तोत्र: वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ...

  1. दूर्वा अर्पण: 21 दूर्वा की गांठें गणेश जी को चढ़ाएं। प्रत्येक गांठ पर ॐ गणेशाय नमः बोलें।
  2. चंद्र अर्घ्य: सूर्यास्त के बाद चंद्रमा दिखाई देने पर तांबे के लोटे में जल, दूध, चंदन मिलाकर अर्घ्य दें। मंत्र: ॐ चंद्रमसे नमः, गणेशाय नमः
  3. व्रत भोजन: फलाहार (आलू, साबूदाना, मूंगफली, दही)। नमक का उपयोग न करें।

विशेष उपाय: बाधा निवारण के लिए

  • आर्थिक संकट: 21 मोदक गणेश जी को चढ़ाएं, फिर गरीबों में बांटें।
  • विवाह बाधा: दूर्वा की माला गणेश जी को पहनाएं, फिर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।
  • स्वास्थ्य समस्या: गणेश अथर्वशीर्ष पाठ 11 बार करें।
  • नौकरी/व्यापार: गणेश यंत्र की पूजा करें, लाल चंदन का तिलक लगाएं।

कथा: संकष्टी चतुर्थी की पौराणिक कथा
एक बार इंद्र देवता पर संकट आया। उन्होंने गणेश जी की आराधना की। गणेश जी ने प्रकट होकर कहा, “जो व्यक्ति मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी को मेरा व्रत करेगा, उसके सभी संकट दूर होंगे।” इंद्र ने व्रत किया और संकट से मुक्ति पाई। तभी से यह व्रत प्रचलित है।

घरेलू टिप्स: पूजा सामग्री

  • आवश्यक: गणेश मूर्ति, दूर्वा, मोदक, सिंदूर, अक्षत, फल, पंचामृत।
  • वैकल्पिक: गणेश यंत्र, लाल कपड़ा, घी का दीपक, धूपबत्ती।
  • बजट में: घर पर बेसन के लड्डू बनाएं, बाजार से दूर्वा लाएं (₹10 प्रति गांठ)।

वैज्ञानिक दृष्टि: चंद्रोदय पूजन का लाभ
चंद्रोदय के समय चंद्रमा की किरणें मन को शांति देती हैं। अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। दूर्वा में औषधीय गुण होते हैं, जो त्वचा रोग और पाचन में सहायक हैं।

संकट से मुक्ति का दिवस
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मकता का पर्व है। आज भगवान गणेश की कृपा से हर बाधा दूर हो सकती है। यदि आप व्रत नहीं भी रख सकते, तो कम से कम ॐ गं गणपतये नमः का 11 बार जाप करें और एक मोदक का प्रसाद ग्रहण करें।

शुभकामना: विघ्न विनाशक गणेश जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें। जय गणेश! जय गणेश! जय गणेश देवा!

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