by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या और पैदल यात्रियों की मौतों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अक्टूबर, 2025) को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वानाथन की पीठ ने सार्वजनिक हित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए सड़क सुरक्षा के पांच प्रमुख क्षेत्रों—पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सुरक्षित क्रॉसिंग, हेलमेट का अनिवार्य उपयोग, गलत लेन में ड्राइविंग और असुरक्षित ओवरटेकिंग, तथा वाहनों में चकाचौंध करने वाली एलईडी सफेद लाइटों, अनधिकृत लाल-नीली स्ट्रोब लाइटों और हॉर्न के दुरुपयोग—पर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। कोर्ट ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, नगर निगमों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को छह महीने के भीतर मोटर वाहन अधिनियम के तहत व्यापक सड़क सुरक्षा नियम बनाने का आदेश दिया है। यह फैसला 2012 में दायर याचिका पर आधारित है, जो सड़क सुरक्षा को मौलिक अधिकारों से जोड़ता है।
फैसले की पृष्ठभूमि: बढ़ते सड़क हादसे और पैदल यात्रियों का संकट
कोर्ट ने अपने आदेश में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2023 में भारत में कुल 1,72,890 सड़क दुर्घटनाओं में मौतें हुईं, जिनमें से 35,221 पैदल यात्री थे। यह कुल मौतों का 20.4 प्रतिशत है, जो 2016 के 10.44 प्रतिशत से दोगुना से अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में पैदल यात्रियों की मौतों में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह, दोपहिया वाहनों के चालक और सवारों की 54,000 से अधिक मौतें हेलमेट न पहनने के कारण हुईं।
पीठ ने चिंता जताई कि फुटपाथ और पैदल यात्री सुविधाएं अक्सर अवैध कब्जे या दुरुपयोग का शिकार हो जाती हैं, जिससे पैदल यात्री सड़क पर उतरने को मजबूर होते हैं और जान का खतरा बढ़ जाता है। कोर्ट ने पुराने फैसलों जैसे ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम (1985) और अहमदाबाद नगर निगम बनाम नावाब खान गुलाब खान (1997) का उल्लेख किया, जिसमें पैदल यात्रियों को सुरक्षित फुटपाथ का अधिकार मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का हिस्सा माना गया है। कोर्ट ने कहा, “फुटपाथों का निर्माण और रखरखाव सड़क मालिक एजेंसियों का कर्तव्य है, ताकि पैदल यात्री सुरक्षित रूप से सड़क पार कर सकें।”
यह फैसला 2012 में दायर एस. राजसीकरण बनाम भारत संघ याचिका पर आया है, जिसमें सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने की मांग की गई थी। मई 2025 में कोर्ट ने ही फुटपाथों और फुटवे के उपयोग को जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग घोषित किया था।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश: विस्तृत रूपरेखा
कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए बहुआयामी दिशानिर्देश दिए हैं, जो तत्काल कार्यान्वयन के योग्य हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पैदल यात्रियों की मौतों को रोकना और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है। प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:
- पैदल यात्रियों की सुरक्षा और फुटपाथों का ऑडिट:
- सभी सड़क मालिक एजेंसियां, जिसमें नगर निगम, राज्य सरकारें और एनएचएआई शामिल हैं, को देश के 50 प्रमुख शहरों में फुटपाथों और पैदल क्रॉसिंग का समयबद्ध ऑडिट कराना होगा।
- ऑडिट में जेब्रा क्रॉसिंग, रोशनी व्यवस्था, ट्रैफिक शांत करने के उपाय (जैसे स्पीड ब्रेकर), तथा फुट ओवरब्रिज और अंडरब्रिज की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि ये सुविधाएं अक्सर असुरक्षित, खराब रखरखरखाव वाली या पहुंच से बाहर होती हैं।
- ऑडिट के दौरान उन 15-20 स्थानों को प्राथमिकता दी जाए जहां पिछले 2-3 वर्षों में पैदल यात्रियों की चोटें या मौतें हुई हों।
- शिकायत निवारण तंत्र:
- नगर निगमों, राज्य सरकारों और एनएचएआई को फुटपाथ रखरखाव, कब्जा हटाने और नई क्रॉसिंग सुझावों के लिए सरल ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करनी होगी।
- शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिक आसानी से अपनी समस्याएं दर्ज करा सकें।
- जवाबदेही और दंड:
- यदि पैदल यात्रियों की मौत सड़क डिजाइन, निर्माण या रखरखाव की कमी से होती है, तो अधिकारियों और ठेकेदारों पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198ए के तहत व्यक्तिगत रूप से मुकदमा चलाया जाए।
- कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान अधिकारियों को लापरवाही से बचाएगा और जिम्मेदारी सुनिश्चित करेगा।
- हेलमेट का अनिवार्य उपयोग:
- सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और एनएचएआई को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोपहिया वाहनों के चालक और सवार दोनों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य बनाने का सख्ती से पालन कराना होगा।
- कोर्ट ने हेलमेट न पहनने से होने वाली मौतों पर निराशा जताई और कहा कि यह रोकथाम योग्य है।
- गलत लेन ड्राइविंग, असुरक्षित ओवरटेकिंग और वाहन संशोधन पर नियंत्रण:
- गलत लेन में ड्राइविंग और असुरक्षित ओवरटेकिंग पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- वाहनों में चकाचौंध करने वाली एलईडी सफेद हेडलाइट्स, अनधिकृत लाल-नीली स्ट्रोब लाइट्स और हॉर्न की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। कोर्ट ने इन्हें “खतरनाक ड्राइविंग प्रथाओं” करार दिया।
- राज्य स्तर पर नियम निर्माण:
- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 138, 210सी और 210डी के तहत पैदल सुरक्षा, फुटपाथ डिजाइन और सड़क निर्माण मानकों पर नियम बनाने होंगे।
- भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) की “पैदल यात्री सुरक्षा दिशानिर्देश (दूसरा संशोधन, जून 2022)” को बाध्यकारी बनाया जाए, जो फुटपाथ डिजाइन और निर्माण के मानक निर्धारित करती है।
कोर्ट ने कहा कि ये निर्देश पैदल यात्रियों को “जान और अंगों की हानि” से बचाने के लिए “आवश्यक” हैं।
सड़क सुरक्षा संकट: आंकड़े और चुनौतियां
भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक राष्ट्रीय महामारी का रूप ले चुकी हैं। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल, अस्पताल और बाजारों के पास दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में पैदल यात्रियों को सबसे अधिक खतरा है। फुटपाथों का अभाव, अवैध कब्जे और खराब रखरखाव के कारण लोग सड़क पर चलने को मजबूर होते हैं। दोपहिया वाहनों पर हेलमेट की अनदेखी और वाहनों के अनधिकृत संशोधन से दुर्घटनाएं और बढ़ रही हैं। कोर्ट ने नोट किया कि ये मौतें “रोकथाम योग्य” हैं, यदि बुनियादी सुविधाएं और नियमों का पालन हो।
कार्यान्वयन और प्रभाव: क्या बदलेगा?
ये निर्देश तत्काल प्रभावी होंगे, और कोर्ट ने एमओआरटीएच को कार्यान्वयन की निगरानी करने का आदेश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन शिकायत तंत्र और व्यक्तिगत जवाबदेही से सुधार होगा, लेकिन सफलता राज्यों के सहयोग पर निर्भर करेगी। एक वकील ने कहा, “यह फैसला सड़कों को पैदल यात्री-अनुकूल बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।” हालांकि, बजट की कमी और प्रवर्तन की चुनौतियां बाधा बन सकती हैं।
यह फैसला न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि मौलिक अधिकारों की रक्षा को भी सुनिश्चित करेगा। जैसे-जैसे राज्य नियम बनाएंगे, उम्मीद है कि पैदल यात्रियों और सड़क उपयोगकर्ताओं की जानें बचेंगी। कोर्ट ने अपील की है कि सभी हितधारक इन दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
