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By: Ravindra Sikarwar

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मंगलवार तड़के सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ। दिल्ली-आगरा मार्ग पर स्थित यमुना एक्सप्रेसवे के माइलस्टोन 127 के पास घने कोहरे के कारण कम दृश्यता हो गई, जिससे सात यात्री बसें और तीन कारें आपस में भिड़ गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई वाहनों में तुरंत आग लग गई और ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। इस भयावह घटना में चार लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों को तत्काल पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।

यह हादसा बलदेव थाना क्षेत्र में हुआ, जब ज्यादातर यात्री बसों में गहरी नींद में थे। अचानक हुई टक्कर से बसों में अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों ने चीख-पुकार मची और जान बचाने के लिए खिड़कियां तोड़कर बाहर कूदना शुरू कर दिया। चश्मदीदों के अनुसार, कोहरे के कारण विजिबिलिटी बेहद कम थी, जिससे ड्राइवरों को आगे चलते वाहन दिखाई नहीं दे रहे थे। पहले कुछ कारें टकराईं, फिर पीछे से आ रही बसें एक के बाद एक उनसे जा भिड़ीं। टक्कर के बाद धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते आग फैल गई।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण की टीम और एसडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत और बचाव कार्य में कई घंटे लगे। जिला अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार खुद मौके पर पहुंचे और ऑपरेशन की निगरानी की। घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि बचे हुए यात्रियों को सरकारी वाहनों से उनके गंतव्य तक भेजा गया। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा कई घंटों तक बंद रहा, जिससे ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किया गया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद और हृदय विदारक बताया। सीएम ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों को पचास हजार रुपये की मदद की घोषणा की है। साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित किया जाए और राहत कार्य में किसी तरह की कमी न हो।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरें हादसे की भयावहता को बयां कर रहे हैं। उनमें धूं-धूं कर जलती बसें, आग की विशाल लपटें और मौके पर मची भगदड़ दिखाई दे रही है। कई वाहन पूरी तरह खाक हो गए, जबकि कुछ के अवशेष बिखरे पड़े हैं। यह दृश्य देखकर किसी का भी दिल दहल जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में उत्तर भारत में घना कोहरा एक बड़ी समस्या बन जाता है, जो सड़क हादसों का प्रमुख कारण बनता है।

यह हादसा सड़क सुरक्षा के प्रति हमें फिर से चेताता है। कोहरे में वाहन चलाते समय स्पीड कम रखना, फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और लो विजिबिलिटी का संयोजन घातक साबित हो सकता है। प्रशासन को भी ऐसे मौसम में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, जैसे कोहरे की चेतावनी जारी करना और स्पीड लिमिट को सख्ती से लागू करना।

यह घटना न केवल मृतकों के परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक भी। हम प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और घायल जल्द से जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौटें। सड़क सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है, इसे नजरअंदाज करने की कीमत बहुत भारी हो सकती है।

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