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Fiscal Policy: संतुलित आर्थिक दृष्टि और विकास की प्राथमिकता

केंद्रीय बजट 2026-27 केवल वित्तीय आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह देश के समग्र विकास की दिशा और आर्थिक स्थिरता का मार्गदर्शन भी प्रस्तुत करता है। बजट में यह स्पष्ट संदेश है कि विकास को तेजी से बढ़ाना है, लेकिन उसे संतुलित और नियंत्रित तरीके से किया जाएगा। कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भारत को आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। इसमें समाज के कल्याण और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उपाय भी प्रमुख रूप से शामिल हैं।

Fiscal Policy: व्यापार, निवेश और वैश्विक तालमेल

बजट में व्यापार और उद्योग को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें सीमा शुल्क और टैरिफ से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव को कम करने और सहयोगी देशों के साथ व्यापारिक समझौतों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। हाल ही में यूरोपीय संघ समेत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं, जिससे भारत का वैश्विक व्यापारिक प्रभाव मजबूत हुआ है। बजट में निर्यात, पूंजी और प्रौद्योगिकी को प्राथमिकता देने की रणनीति के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया गया है।

भविष्य की जरूरतों और नए क्षेत्रों में निवेश

बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाकर 8 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है, जिससे व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग और आत्मनिर्भरता बढ़ सके। इसके साथ ही नए क्षेत्रों जैसे कार्बन न्यूट्रलिटी, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन, आई-क्लाउड और सुरक्षित डेटा स्टोरेज में निवेश बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इन कदमों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और 2030-31 तक जीडीपी के अनुपात में 51 प्रतिशत तक विकास की दिशा में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का लक्ष्य साधा जाएगा।

कुल मिलाकर यह बजट नरेंद्र मोदी सरकार के विकसित भारत के संकल्प को वित्तीय संतुलन और राजकोषीय जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें आर्थिक विकास, निवेश, वैश्विक तालमेल और समाज के कल्याण को संतुलित रूप से प्राथमिकता दी गई है।

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