by-Ravindra Sikarwar
दमोह: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए एक सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में लगभग 25% लोग फैटी लिवर की बीमारी से ग्रस्त हैं। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह एक गंभीर महामारी का रूप ले सकती है।
बदलती जीवनशैली बन रही है बड़ी वजह:
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अठ्या ने बताया कि यह बीमारी पहले मुख्य रूप से शराब पीने वाले लोगों में पाई जाती थी, लेकिन अब नॉन-अल्कोहलिक लोगों में भी तेजी से फैल रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण लोगों की बदलती जीवनशैली और खान-पान को माना जा रहा है।
- सर्वे के आंकड़े: जिले में 87,000 से अधिक लोगों की जांच की गई, जिसमें से 10,033 पुरुष और 11,295 महिलाएं इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों के साथ पाए गए।
- मोटापा एक मुख्य कारण: रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 73% लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) सामान्य से बहुत ज्यादा है, जो इस बीमारी की एक सीधी वजह है। जिन महिलाओं की कमर का घेरा 80 सेमी और पुरुषों का 90 सेमी से अधिक है, उनमें यह बीमारी तेजी से फैल रही है।
क्या हैं इस बीमारी के खतरे?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बीमारी को नजरअंदाज किया गया तो यह लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। फैटी लिवर होने पर लिवर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसका सीधा असर पाचन तंत्र के साथ-साथ किडनी और रक्त पर भी पड़ सकता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके:
स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से बचाव के लिए कुछ आसान सुझाव दिए हैं:
- तले-भुने और ज्यादा मसालेदार भोजन से परहेज करें।
- नियमित रूप से हल्का-फुल्का व्यायाम करें।
- समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराएं।
- आयुर्वेदिक तरीके और योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
दमोह जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों की जांच कर रहा है। यह पहल इस समस्या से निपटने के लिए एक सकारात्मक कदम है।
