By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: राजधानी के व्यस्त इलाके में एक दिल दहला देने वाला हादसा उस वक्त हुआ जब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में तैनात महिला सहायक उप निरीक्षक (ASI) परवीन नकवी की निजी कार ने एक निजी सुरक्षा गार्ड को जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा पिछले सप्ताह हुआ था और टक्कर इतनी भयानक थी कि 65 वर्षीय बुजुर्ग गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान रविवार 23 नवंबर की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। सबसे दर्दनाक बात यह है कि उनकी मौत ठीक एक दिन बाद हुई जब उनकी बेटी का निकाह तय था।
परिवार के लोगों ने बताया कि निकाह की तारीख 22 नवंबर रखी गई थी। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। घर में रौनक थी, रिश्तेदार आए हुए थे, लेकिन जैसे ही पिता के हादसे की खबर मिली, पूरा घर मातम में डूब गया। बेटी की शादी टाल दी गई। दुल्हन के जोड़े की जगह अब घर में कफन रखा हुआ है। मृतक के बड़े बेटे ने बताया, “पिताजी की तबीयत देखकर हमने फौरन निकाह स्थगित कर दिया। वे अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। हम सब यही दुआ कर रहे थे कि वे जल्दी ठीक हो जाएं और बेटी की शादी में शामिल हों, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।”
मृतक बुजुर्ग का नाम रामस्वरूप यादव (65) था। वे पिछले कई सालों से भोपाल के एक निजी सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। परिवार के अनुसार, उस दिन वे अपनी ड्यूटी पूरी करके घर लौट रहे थे। शाम का वक्त था और सड़क पर ट्रैफिक भी सामान्य था। तभी तेज रफ्तार से आ रही एक सफेद रंग की कार ने उन्हें टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार की स्पीड बहुत ज्यादा थी और ड्राइवर ने ब्रेक तक लगाने की कोशिश नहीं की। टक्कर के बाद रामस्वरूप सड़क पर दूर जा गिरे और उनका सिर फूट गया। खून बहने लगा और वे तुरंत बेहोश हो गए।
हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोग दौड़े और घायल को अस्पताल पहुंचाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार को कब्जे में ले लिया। कार मालकिन खुद ASI परवीन नकवी निकलीं, जो EOW की आवक-जावक शाखा में पदस्थ हैं। प्राथमिक जांच में पता चला कि कार उन्होंने खुद चला रही थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और लापरवाही से वाहन चलाने तथा मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।
परिजनों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि हादसे के बाद से आरोपी महिला अधिकारी का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अभद्र रहा है। मृतक के परिजनों ने बताया कि जब वे थाने पहुंचे तो ASI परवीन नकवी ने उनसे बदतमीजी से बात की। परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम दुख की इस घड़ी में न्याय मांगने गए थे, लेकिन वहां हमें ही अपमान सहना पड़ा। महिला अधिकारी ने कहा कि ‘तुम लोग गरीब हो, कुछ नहीं कर सकते’ जैसी बातें कीं। वे बार-बार यह कह रही थीं कि उनका बहुत रसूख है और कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में पुलिस ने मामला दबाने की कोशिश की। FIR दर्ज करने में काफी देर लगाई गई और धाराएं भी हल्की लगाई गईं। बाद में परिजनों के हंगामे और मीडिया के दबाव के बाद IPC की धारा 304A (लापरवाही से मौत कारित करना) जोड़ी गई। फिलहाल कार जब्त कर ली गई है और आरोपी अधिकारी से पूछताछ की जा रही है।
इस पूरे मामले ने भोपाल में एक बार फिर पुलिस महकमे के अंदर के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम आदमी की जान की कीमत क्या सिर्फ इसलिए कम है क्योंकि सामने वाला व्यक्ति वर्दी में है? मृतक के परिवार ने मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस महानिदेशक तक से गुहार लगाई है कि दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और उनके परिवार को उचित मुआवजा मिले। साथ ही उन्होंने मांग की है कि आरोपी को निलंबित किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।
रविवार को जब रामस्वरूप का पार्थिव शरीर घर लाया गया तो पूरा मोहल्ला उमड़ पड़ा। उनकी बेटी बार-बार बेहोश हो रही थी। एक दिन पहले जहां मेहंदी और हल्दी की खुशबू थी, वहां अब अगरबत्ती की गंध है। परिवार अब टूट चुका है। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने जिंदगी भर दूसरों की सुरक्षा की, लेकिन उनकी रक्षा कोई नहीं कर सका।”
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर जांच कराई जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या हादसे के वक्त आरोपी अधिकारी शराब के नशे में थीं या नहीं। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने की बढ़ती घटनाओं की ओर इशारा करता है। खासकर जब वाहन चालक कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो तो पीड़ित परिवार को न्याय मिलना और भी मुश्किल हो जाता है। रामस्वरूप यादव का परिवार अब बस यही उम्मीद लगाए बैठा है कि उनकी मौत बेकार न जाए और दोषी को कड़ी सजा मिले।
