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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से प्रेरित एक कथित ‘थिंक टैंक’ ने विवादों का केंद्र बन लिया है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में संचालित ‘सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज’ (सीएनएमएस) या ‘नमो केंद्र’ को फर्जी रिसर्च संस्थान बताते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 24 अक्टूबर 2025 को एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। यह संस्थान बिना सरकारी अनुमति के पीएम के नाम का इस्तेमाल कर किताबें प्रकाशित करने, सेमिनार आयोजित करने और राष्ट्रपति को पत्र लिखने जैसे काम करता रहा। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की शिकायत पर कार्रवाई हुई, जिसमें भाजपा सांसद कंगना रनौत का नाम भी जुड़ा है। आइए, इसकी पूरी पृष्ठभूमि, गतिविधियों और कानूनी पचड़े को विस्तार से समझते हैं।

नमो केंद्र की स्थापना: 2021 से शुरू हुई कहानी
यह केंद्र 25 जनवरी 2021 को भारतीय ट्रस्ट एक्ट, 1882 के तहत उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के तहसील कोइल में एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया। संस्थापक और चेयरमैन हैं जासिम मोहम्मद, जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व मीडिया कंसल्टेंट रह चुके हैं। जासिम ने इसे ‘नमो केंद्र’ या ‘सीएनएमएस’ नाम दिया, जो कथित तौर पर पीएम मोदी के नेतृत्व, शासन और वैश्विक कूटनीति पर शोध करने का मंच है।

  • उद्देश्य (केंद्र की वेबसाइट के अनुसार): यह एक स्वतंत्र वैश्विक रिसर्च सेंटर है, जहां प्रमुख नेता, बुद्धिजीवी, विचारक, समाज सुधारक और शिक्षाविद एकत्र होकर राष्ट्र की बहुआयामी चुनौतियों पर चर्चा करते हैं। केंद्र भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन तैयार करने का दावा करता है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, पड़ोसी देशों पर अध्ययन, शासन, अर्थव्यवस्था, विज्ञान-तकनीक, मातृभाषा और सभ्यतागत इतिहास जैसे विषय शामिल हैं।
  • क्षेत्रीय दायरा: केंद्र का दावा है कि यह वैश्विक स्तर पर काम करता है, लेकिन मुख्यालय अलीगढ़ में ही है। वेबसाइट (namostudies.com) पर पीएम मोदी की तस्वीरें, वीडियो और डेटाबेस उपलब्ध हैं।
  • ट्रस्ट का नाम बदलाव: शुरुआत में सामान्य नाम से पंजीकृत, बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ‘सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज’ कर लिया गया।

जासिम मोहम्मद ने 2016 से ही इसकी योजना बनाई थी, लेकिन 2021 में औपचारिक रूप से लॉन्च किया। उन्होंने कहा था, “मोदी नई भारत का प्रतीक हैं – मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील।” केंद्र को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में एएमयू के लॉ फैकल्टी के पास स्थापित किया गया।

गतिविधियां: किताबें, सेमिनार और विवादास्पद पत्र
केंद्र ने 2021 से अब तक कई गतिविधियां कीं, जो पीएम मोदी के ‘मॉडल’ को बढ़ावा देने का दावा करती हैं। लेकिन ये बिना अनुमति के थीं, जिससे यह फर्जी ठहरा। मुख्य काम:

  1. प्रकाशन और किताबें:
  • इंटरनेशनल रिलेशंस सीरीज के चार खंड – ‘हरबिंगर ऑफ चेंज’, ‘हराल्डिंग ए न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’, ‘ए न्यू अवेकनिंग’ और ‘टुवर्ड्स ऑल-अराउंड हैप्पीनेस’।
  • सोशल रेवोल्यूशन – डॉ. आशीष गुप्ता द्वारा।
  • इंडिया आफ्टर 2014 – तुषिता भंडारी द्वारा।
  • पीएम की ‘मन की बात’ का संग्रह।
  • हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में प्रकाशन, जो मोदी के पालिसी जैसे ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर केंद्रित।
  • कुल 10 से अधिक किताबें, जो केंद्र की वेबसाइट पर उपलब्ध।
  1. कार्यक्रम और चर्चाएं:
  • सेमिनार, सम्मेलन, पुस्तक चर्चाएं: राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति, पर्यावरण नीतियां, मीडिया प्रभाव और सामाजिक परिवर्तन पर।
  • विमर्श और संवाद: बुद्धिजीवियों के साथ पैनल डिस्कशन।
  • वीडियो गैलरी: मोदी पर वीडियो, रतन टाटा मेमोरियल लेक्चर (2024)।
  • सदस्यता और छात्रवृत्ति: शोधकर्ताओं को जोड़ने का प्रयास, पूर्व नौकरशाहों, राजनयिकों और संपादकों को आमंत्रित।
  1. विवादास्पद कदम:
  • सितंबर 2025 में कार्यकारी समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर रतन टाटा को मरणोपरांत भारत रत्न देने की सिफारिश की।
  • केंद्र का दावा: यह गैर-सरकारी है, लेकिन सरकारी या राजनीतिक किसी भी इकाई से असंबद्ध।
गतिविधि प्रकारउदाहरणउद्देश्य (दावा)
प्रकाशनइंटरनेशनल रिलेशंस सीरीजमोदी की विदेश नीति पर शोध
कार्यक्रमरतन टाटा लेक्चरसामाजिक सद्भाव पर चर्चा
अनुसंधान क्षेत्रराष्ट्रीय सुरक्षानीति सुझाव तैयार करना
मीडियावीडियो और डेटाबेस जन जागरूकता बढ़ाना

कंगना रनौत का कनेक्शन: विवाद का नया मोड़
केंद्र की वेबसाइट पर भाजपा सांसद कंगना रनौत की तस्वीर और वीडियो है, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने पीएम मोदी के भाषणों का एक खंड ‘संकलित और संपादित’ किया। सितंबर 2024 का यह वीडियो ‘नमो स्टडीज बुक’ से जुड़ा है। कंगना ने इसे प्रमोट किया, लेकिन अब विवाद बढ़ने पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। यह कनेक्शन केंद्र को वैधता देने का प्रयास लगता है, लेकिन जांच में यह उजागर हुआ कि सब बिना अनुमति के था।

क्यों फर्जी? कानूनी उल्लंघन और पीएमओ की शिकायत

  • अनुमति की कमी: केंद्र ने एम्बल्म्स एंड नेम्स (प्रिवेंशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 1950 का उल्लंघन किया। पीएम का नाम इस्तेमाल करने के लिए केंद्र या पीएमओ से मंजूरी जरूरी थी, जो नहीं ली गई।
  • पीएमओ की शिकायत: अप्रैल 2025 में एक वकील की सिविल कोर्ट शिकायत के साथ पीएमओ ने सीबीआई को पत्र लिखा। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि जासिम ने 2021 से बिना अनुमति केंद्र चला रहे थे।
  • एफआईआर विवरण: 24 अक्टूबर 2025 को दर्ज, जिसमें जासिम मोहम्मद पर नाम का दुरुपयोग, फर्जी ट्रस्ट संचालन और जनता को भ्रमित करने का आरोप। केंद्र ने एफआईआर के बाद बयान जारी कर कहा, “हम कानूनी रूप से पंजीकृत हैं और किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं।”
  • सीबीआई का कदम: प्रारंभिक जांच के बाद पूर्ण जांच शुरू। जासिम की पूर्व भूमिका (एएमयू मीडिया कंसल्टेंट) भी जांच के दायरे में।

प्रभाव और प्रतिक्रियाएं:

  • राजनीतिक: विपक्ष ने इसे ‘नाम का व्यावसायिक दुरुपयोग’ कहा, जबकि भाजपा ने चुप्पी साधी। कंगना कनेक्शन से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी।
  • केंद्र की सफाई: वेबसाइट पर स्पष्ट किया गया कि यह गैर-सरकारी और स्वतंत्र है, लेकिन एफआईआर ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
  • विशेषज्ञ मत: कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एक्ट के तहत सजा 3 साल तक जेल या जुर्माना हो सकती है। यह मामला नामों के दुरुपयोग पर नई बहस छेड़ सकता है।

यह घटना दिखाती है कि प्रशंसकों के नाम पर बने संगठन कैसे कानूनी जाल में फंस जाते हैं। सीबीआई जांच जारी है, और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों का सहारा लें।

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